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Tuesday, 13 April 2021

चित्रकार रामकुमार

रामकुमार भारत के एक कलाकार और लेखक थे। भारत के सर्वश्रेष्ठ अमूर्त चित्रकारों में उनकी गणना होती है। 
जन्म की तारीख और समय: 23 सितंबर 1924हिमाचल प्रदेश
मृत्यु की जगह और तारीख: 14 अप्रैल 2018दिल्ली

पद्मभूषण से सम्मानित प्रख्यात चित्रकार एवं प्रसिद्ध लेखक रामकुमार का आज सुबह यहां अपने निवास पर निधन हो गया। वह 94 वर्ष के थे। उनके परिवार में एक पुत्र है जो ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं। उनका अंतिम संस्कार यहां निगमबोध घाट पर ढाई बजे दिन में किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश की राजधनी शिमला में 1924 में जन्मे रामकुमार हिंदी के मशहूर लेखक निर्मल वर्मा के बड़े भाई थे। 

प्रसिद्ध कला समीक्षक एवं रामकुमार के मित्र प्रयाग शुक्ल ने यूनीवार्ता को बताया कि राम कुमार पिछले 20 दिन से राजधानी के पटपडग़ंज इलाके में स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती थे। वह विश्व विख्यात चित्रकार एमएफ हुसैन, तैयब मेहता और सैयद हैदर रजा के आत्मीय मित्र थे। उनके निधन से आधुनिक भारतीय चित्रकला का एक प्रमुख स्तंभ ढह गया। प्रसिद्ध संस्कृति कमीज़् अशोक वाजपेयी, कला समीक्षक विनोद भारद्वाज, प्रसिद्ध लेखक गिरिधर राठी समेत कई लेखकों, चित्रकारों ने रामकुमार के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

सेंट स्टीफन कालेज से पढ़े रामकुमार ललित कला अकेडमी के फेलो भी थे। उनकी पेंटिंग हुसैन तैयब मेहता की तरह करोड़ो रुपये में बिकती थी। वह अपने अमूर्त चित्रों के लिए जाने जाते थे। उनकी अपनी अलग शैली थी। वह साठ के दशक के चर्चित कहानीकार भी थे। उनकी चित्रों की प्रदर्शनी दुनिया के कई देशों में लगी थी।
 कुछ लोगों का हर काम अनूठा होता है। रामकुमार उनमें से एक थे। कहानियां लिखीं तो अनूठी। चित्र बनाए तो अनूठे। वे एक जलते हुए मशाल की तरह थे, जिनकी रोशनी में कई कलाकारों ने अपने-अपने रास्ते देखे। रामकुमार नहीं रहे। कथा और कला की दुनिया में उनकी उपस्थिति ने परंपरा का निर्माण किया था। बनारस पर बनाए उनके चित्रों की लंबे समय तक चर्चा होती रही, लेकिन बाद के चित्रों में भी किसी देश या शहर की यात्रा का प्रभाव दिखता रहा। यह बात अलग है कि अमूर्त शैली की वजह से हमने उन चित्रों को किसी खास शहर से जोड़कर नहीं देखा। प्रकृति उनके बनाए चित्रों में एक अलग ढंग से आती रही। उन्होंने कभी प्रकृति का वास्तविक चित्रण तो नहीं किया, मगर अहसास हमेशा तीव्र रहा। चटकीले रंगों से बचते हुए जगहों का जैसा इंप्रेशन उनके कैनवस पर दिखता है, वह उन्हें दूसरों से अलग रखता है। इस

कथाकार-कलाकार के चित्रों की सबसे बड़ी विशेषता यही थी कि पाठक से संवाद में इनकी कला आत्मीय-सी लगती थी। उनके आकार संवाद की स्थिति बनाते रहे और उसमें हम संवेदना पाते रहे। वे संकोची स्वभाव के थे। अपनी रचनाओं पर खुद बात करने में उन्हें एक झिझक-सी होती थी, लेकिन कला पर बहस के पक्षधर थे। सर्दियों की सुबह उन्हें बहुत पसंद थी। कहते थे, "आकाश खुला-खुला लगता है, मुक्ति-सी महसूस होती है।" बरसों पेरिस में रहे।

छोटे भाई और मशहूर साहित्यकार निर्मल वर्मा के न रहने के बाद, कई बार की बातचीत में उनके अंदर एक खालीपन का अहसास होता था। हाल के दिनों में वह दिल्ली में रह रहे थे। उनके अब न रहने पर ऐसा लगता है, मानो एक ऐसा कलाकार चला गया, जिनकी आंखें और दिल हमेशा एक नए शहर की तलाश करते थे। 1924 में शिमला में जन्मे रामकुमार मशहूर लेखक निर्मल वर्मा के बड़े भाई थे। अपने समकालीन चित्रकारों एम.एफ. हुसैन, तैयब मेहता और सैयद हैदर रजा की तरह रामकुमार भी प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप से जुड़े हुए थे।

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