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Saturday, 11 March 2023

भारतीय प्रागैतिहासिक क्षेत्र

नमस्कार दोस्तों इसमें आपको भारतीय प्रागैतिहासिक क्षेत्रों के बारे में बताया जाएगा|
क्षेत्रों के बारे में जानने से पहले आपको यह जानना जरूरी है कि शीला चित्र क्या होता है और भित्ति चित्र क्या होता है |
शीला चित्र:- इसमें दीवाल पहले से ही तैयार रहती है यानी पत्थरों पर चित्र बनाया जाता है
भित्ति चित्र :- इसमें भित्तिचित्र यानी अपने सतह को जिस पर चित्र बनाया जाएगा उसको खड़िया, रामराज,धान की जर्दी या चुना ,पर इन सभी से भी तैयार किया जाता है तब उस पर चित्रकारी की जाती है

अब यह भी जानना जरूरी है कि कर्षण चित्र क्या होता है त ●कर्षण चित्र:- दक्षिण भारत क्षेत्र में बनाया जाता है और पत्थर पर खरोच मारकर बनाया जाता है उसे कर्षण चित्र कहते हैं|

1:- उत्तर प्रदेश के क्षेत्र
उत्तर प्रदेश की बात की जाए तो सबसे पहले मिर्जापुर क्षेत्र में प्रागैतिहासिक चित्र प्राप्त हुए हैं

1.मिर्जापुर :-
1880 ईस्वी में आर्चीवाल कार्लाइल  व जान काक बर्न ने मिर्जापुर के चित्रों की खोज की थी सोन नदी के पास विन्ध्य  की कैमूर श्रृंखला लगभग यहां पर सबसे अधिक चित्र प्राप्त हुए हैं।

मिर्जापुर की अन्य क्षेत्र
1. लिखूंनिया:- गरई नदी के किनारे यहां पर जो चित्र प्राप्त हुए हैं नित्य वादन में मस्त व्यक्तियों व हाथियों के पकड़ने का चित्र है. 

2. हरनी हरण:- हरनीहरण क्षेत्र में आखेटको की प्रहार करती मुद्राएं दिखाई गई हैं और ज्यादातर गैन्डे का आखेट करती हुई मुद्राएं दिखाई गई है।

3. भंडारिया:- भंडारिया से घायल सूअर का चित्र मिला है।

4. घोड़ासमंगर:- यहां से गेंडे का आखेट करते हुए चित्र मिला है।

5.मड़हरिया:- यहां से ऊंट का चित्र मिला है।

6. लोहारी:- यहां से जलती मशाल का चित्र मिला है।

● मानव ने अपनी मन की भावनाओं को सशक्त रेखाओं के माध्यम से सिला ऊपर चित्र अंकित किया यह सामुदायिक कला रही.

2. बांदा क्षेत्र:-
   1907 मे 

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