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Sunday, 26 December 2021

पढ़ाई मे सफलता कैसे मिले

ऐसे ही हालातों से गुजर कर मिलती है कामयाबी
और लोग एक पल में कह देते हैं कि किस्मत अच्छी थी..

लोअर क्लास और मिडिल क्लास के सबसे निचले पायदान पर मौजूद, सरकारी नौकरी की आस लगाए बैठे लाखों आकांक्षीयो की कहानी जो MBA, इंजीनियरिंग, मेडिकल एवं अन्य प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी करने में असमर्थ होते हैं।

उन्हें उनके घरवालों से सिर्फ महीने का मकान किराया, घर के खेत में उपजी धान का चावल एवं गेहूं का आटा, गैस भराने के लिए एवं लुसेंट किताब खरीदने के रुपए ही मिल सकता है।

उनके सामने इन सीमित संसाधनों से महीने निकालने की चुनौती पहले से बनी रहती है। इस दौरान खाना बनाने में कितना कम से कम समय खर्च हो इसका भी ध्यान रखना होता है। दाल भात एवं आलु का चोखा एक ही समय में एक साथ कैसे बनता है ये सिर्फ इनको पता है।

छात्र जीवन वह जन्नत है जहां आप सिर्फ शिक्षा प्राप्त नही करते बल्कि जीवन जीने का ढंग भी प्राप्त करते हैं।
"बस कुछ ही दूर तो है" बोलकर पैदल ही सफर तय करके कुछ पैसे बचा लेने वाला अनुभव, 5 रुपए की चाय बाहर पीने से अच्छा 5 रुपए पैकट वाला दूध लेकर तीन कप चाय बनाने वाला विश्वास, 20 रुपए में सभी सब्जियों का आनंद लेना, या फिर 100 ग्राम पनीर और 10 रुपए की मटर की पार्टी का लुफ्त उठाना, किलो के भाव मिलने वाली वाली कॉपी खरीद कर पैसे बचाना.. इन सब का अपना अलग ही आनंद है. खाना जल गया हो या सब्जी में नमक कम हो या फिर चावल पका ही न हो, खाते समय सभी का स्वागत ऐसे किया जाता है मानो किसानों के मेहनत को कद्र करने का ठेका इन्हें ही मिला हो।

मां बाप के दर्द को अपने सपनों में सहेजना कोई इनसे सीखे।
जिस समय जमाने को बाइक, आइफोन, फिल्में इत्यादि का आने का इंतजार रहता है उस समय इन्हें प्रतियोगिता दर्पण, वैकेंसी, रिजल्ट आदि का इंतजार रहता है।

जहां आज भी समाज में जात-पात, धर्म, संप्रदायिकता का जहर विद्यमान है वहीं इनके कमरे में एक ही थाली में विभिन्न जाति एवं धर्मों का हाथ निवाले को उठाने के लिए एक साथ मिलता है। इससे बढ़िया समाजिक सौहार्द का उदाहरण कहीं और मिल ही नहीं सकता।

कुल मिलाकर इनका एक ही लक्ष्य है परीक्षा को पास कर मां बाप को वो सब कुछ देना जिसके लिए वो एक दिन तरसे थे।
मुझे गर्व है ऐसे लड़कों पर जो अपने सपनो को  मंज़िल तक ले जाने में सफल होते है।
🙏💐🙏🏼💐🙏🏼💐🙏🏼💐artgyankala 

Wednesday, 28 July 2021

काकतीय रूद्रेश्वर मंदिर : यूनेस्को की विश्व धरोहर में सम्मिलित

तेलंगाना के वारंगल में स्थित काकतीय रूद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर को अब विश्व धरोहर की सूची में शामिल कर लिया गया है।

https://youtu.be/bcIhE84XMZMतेलंगाना के वारंगल में स्थित काकतीय रूद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर को अब विश्व धरोहर की सूची में शामिल कर लिया गया है। एक तारे के आकार का यह प्राचीन मंदिर स्थापत्य कला का शानदार नमूना है। चीन में यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 44वें सत्र में इसे विरासत स्थल के रूप में अंकित किया। नॉर्वे को छोड़कर 22 सदस्यों ने भारत के इस विरासत के पक्ष में राय दी। काकतीय रूद्रेश्वर मंदिर को सूचिबद्ध किए जाने के बाद अब भारत के 39 स्थल विश्व विरासत में शामिल कर लिए गए हैं।
रूद्रेश्वर मंदिर का निर्माण काकतीय राजा रूद्रदेव ने 12वीं शताब्दी में करवाया था। इस मंदिर में एक हजार स्तंभ हैं। इसलिए इसे हजार स्तंभों वाला मंदिर भी कहते हैं। इसके निर्माण में जिन पत्थरों का उपयोग हुआ है वह पानी में भी नहीं डूबते। यह मंदिर दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह अकेला ऐसा मंदिर है जो एक तारे के आकार का है। खास बात यह है कि यहां एक ही छत के नीचे भगवान शिव और विष्णु के साथ सूर्य देव की मूर्ति है। इसलिए इसे त्रिकुटल्यम भी कहते हैं। आमतौर पर भगवान शिव और विष्णु के साथ ब्रह्मा की प्रतिमा होती है।
रूद्रेश्वर मंदिर वारंगल की हनमकोंडा पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर के मुख्य दरवाजे पर भगवान शिव के प्रिय नंदी की विशाल प्रतिमा स्थापित है। इसे काले पत्थर को तराश कर बनाया गया है। मंदिर में स्तंभों पर बहुत ही बारीक वास्तुकला है। इसमें सुई से भी बारीक छेद हैं। खास बात यह है की इस मंदिर में विराजमान देवों को मंदिर के किसी भी कोने से देखने पर कोई स्तंभ बीच में नहीं आता है। मंदिर के निर्माण में 72 साल लगे। इसमें पांच फुट ऊंची भगवान गणेश की भी एक प्रतिमा है। इसकी नींव में बालू भरी हुई है, जो इसके भूकंपरोधी होने का प्रमाण है। इसे ‘सैंडबॉक्स’ तकनीक कहा जाता है।https://youtu.be/bcIhE84XMZM
इस मंदिर के निर्माण के दौरान बेहतर नक्काशी और उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। इस मंदिर का प्रभावशाली प्रवेशद्वार, हजार विशाल खंभे और छतों के शिलालेख आकर्षण केंद्र हैं।
वारंगल स्थित यह शिव मंदिर एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसका नाम इसके शिल्पकार रामप्पा के नाम पर रखा गया। काकतीय वंश के राजा रूद्र देव ने वर्ष 1163 में करवाया था। खास बात यह है कि इस दौर में बने ज्यादातर मंदिर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं, लेकिन कई प्राकृतिक आपदाओं के बाद भी इस मंदिर को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा है। यह शोध का विषय भी रहा है। यह दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है।

यूनेस्को विश्व विरासत स्थल ऐसे विशेष स्थानों (जैसे वन क्षेत्र, पर्वत, झील, मरुस्थल, स्मारक, भवन, या शहर इत्यादि) को कहा जाता है, जो विश्व विरासत स्थल समिति द्वारा चयनित होते हैं। यही समिति इन स्थलों की देखरेख यूनेस्को के तत्वावधान में करती है। इसका उद्देश्य विश्व के ऐसे स्थलों को चयनित एवं संरक्षित करना होता है, जो विश्व संस्कृति की दृष्टि से मानवता के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।

कुछ खास परिस्थितियों में ऐसे स्थलों को इस समिति द्वारा आर्थिक सहायता भी दी जाती है। प्रत्येक विरासत स्थल उस देश विशेष की संपत्ति होती है, जिस देश में वह स्थल स्थित है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय का हित भी इसी में होता है कि वे आनेवाली पीढ़ियों के लिए और मानवता के हित के लिए संरक्षण करें।

भारत की धरोहरhttps://youtu.be/bcIhE84XMZM

भारत के 38 यूनेस्को विरासत स्थलों में से 31 सांस्कृतिक धरोहर हैं। सात 7 प्राकृतिक धरोहर हैं और एक मिश्रित धरोहर है। यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची में अब भारत के 48 स्थान शामिल हैं। साल 2020 में मध्य प्रदेश के ग्वालियर और ओरछा शहरों को यूनेस्को के विश्व धरोहर शहरों की सूची में शामिल किया गया था। विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जाने वाला प्रमुख प्राकृतिक धरोहर काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान है। इसे 1985 में विश्व विरासत स्थल के रूप में घोषित किया गया। अन्य एक प्रमुख उद्यान मानस वन्यजीव अभयारण्य को जून 2011 में सूची में शामिल किया गया।

Friday, 23 July 2021

ब्रिटेन में मिला 460 करोड़ साल से छिपा ‘खजाना’, पृथ्वी से भी पुराना, खोल सकता है जीवन के राज

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों के हाथ करोड़ों साल पुराना 'खजाना' लगा है. वैज्ञानिकों को करीब 460 करोड़ साल पुराना उल्कापिंड मिला है. यह पत्थर का टुकड़ा धरती से भी पुराना है. धरती की उम्र लगभग 454 करोड़ साल है. यह पत्थर पृथ्वी की उत्पत्ति के कई राज खोल सकता है.

अंतरिक्ष से आए इस उल्कापिंड को सबसे पुराना पत्थर बताया जा रहा है. करीब 300 ग्राम का यह पत्थर इंग्लैंड के ग्लोस्टशायर के एक गांव के पास मिला है. ईस्ट एंग्लियन एस्ट्रोफिजिकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (EAARO) में एस्ट्रोकेमिसिट्री के प्रोफेसर डेरेक रॉबसन ने इसे खोजा है. इस साल फरवरी के अंत में वह अपनी टीम के साथ उल्कापिंड के टुकड़ों की तलाश में निकले थे. EAARO
डेरेक रॉबसन और उनकी टीम लैब में इस उल्कापिंड के बारे में अध्ययन करने में लगी हैं. माना जा रहा है कि यह उल्कापिंड 17.7 करोड़ किलोमीटर का सफर तय करके धरती पर आया है और इसका असली घर मंगल या जूपिटर हो सकता है. मगर विशेषज्ञों की दिलचस्पी इसके सफर से ज्यादा इसकी उम्र को लेकर है. माना जा रहा है कि यह उल्कापिंड हमारे सौरमंडल के निर्माण से भी पहले का है. 

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस पत्थर से धरती पर जीवन की उत्पत्ति के कई राज खुल सकते हैं. EAARO ने बयान में कहा कि ऐसा लग रहा है कि यह थर्मल मेटाफोरफिजम से नहीं गुजरा है और लंबे समय से यहीं पर है. मंगल या किसी अन्य ग्रह के निर्माण से भी पहले से यह अनछुआ यहां पड़ा हुआ है.
इससे पहले वैज्ञानिकों को मार्च में भी इतना ही पुराना उल्कापिंड मिला था. यह उल्कापिंड पिछले साल सहारा के रेगिस्तान में मिला था. इस पत्थर को EC002 नाम दिया गया था.
फ्रांस और जापान के वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पत्थर कभी तरल लावा था, लेकिन बाद में ठंडा होकर यह ठोस हो गया. करीब एक लाख साल में यह तरल से ठोस बनकर करीब 31 किलो का पत्थर बन गया
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि इस तरह के तत्वों वाला उल्कापिंड आज तक नहीं मिला है क्योंकि या तो वे बहुत विशाल रूप ले लेते थे या फिर नष्ट हो जाते थे. 
इस उल्कापिंड में कई तरह के मिनरल्स और तत्व मौजूद हैं. इस उल्कापिंड का बड़ा हिस्सा ओलिविन और फाइलोसिलिकेट्स जैसे खनिजों से मिलकर बना हुआ है.

Wednesday, 21 April 2021

केंद्र की महत्वपूर्ण योजनाएं 🏵️🏵️

 केंद्र की महत्वपूर्ण योजनाएं  🏵️🏵️

☛ योजना.             :-  हृदय योजना 
☛ प्रारंभ तिथि        :-  21 जनवरी 2015                      
☛ उद्देश्य                 :-  भारत के प्राचीन 12 नगरों के        सर्वाेन्मुखी विकास एवं ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के लिए

☛ योजना             :-  बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं                       
☛ प्रारंभ तिथि       :-   22 जनवरी 2015                       
☛ उद्देश्य                 :-  लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या कम होने के कारण बढ़ते लिंगानुपात को कम करने पानीपत (हरियाणा) के लिए

☛ योजना             :-  सुकन्या समृद्धि योजना                       
☛ प्रारंभ तिथि       :-  22 जनवरी 2015                      
☛ उद्देश्य                 :-  माता-पिता, लड़की के नाम से 10 वर्ष से कम आयु में बैंक खाता खोल सकेंगे।
https://youtu.be/GDIPLaAqfLY
☛ योजना             :-  मिशन इन्द्रधनुष                       
☛ प्रारंभ तिथि      :-  दिसम्बर 2014                       
☛ उद्देश्य                 :-  सात टीका निवारणीय बीमारियों डिफ्थीरिया, काली खाॅसी, टिटनेस, पोलियो, टी. बी. खसरा और हेपेटाइटिस ‘बी’ का 2020 तक ऐसे सभी बच्चों का टीकाकरण करना है, जिन्हें आंशिक रूप से टीका लगा है या इससे वंचित है।

☛ योजना             :-  मृद्रा स्वास्थ्य कार्ड योजना                       
☛ प्रारंभ तिथि      :-  19 फरवरी 2015   (सूरतगढ़, श्रीगंगानगर)                        
☛ उद्देश्य                 :-  पोषक तत्वों और उर्वरकों के उचित उपयोग से उत्पादकता में सुधार लाकर किसानों की मदद करना।

☛ योजना             :-  प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना                       
☛ प्रारंभ तिथि       :-  2015                      
☛ उद्देश्य                 :-  युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करके उन्हें कुशल श्रमिक बनाया जा सकेगा।

☛ योजना             :-  प्रधानमंत्री मुद्रा योजना                       
☛ प्रारंभ तिथि       :-  8 अप्रैल 2015 (नई दिल्ली)                      
☛ उद्देश्य                 :-  असंगठित क्षेत्र के छोटे कारोबारियों के लिए वित्त एवं पुनिर्वित्त की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु।

☛ योजना             :-  अटल पेंशन योजना                       
☛ प्रारंभ तिथि       :-  9 मई 2015                      
☛ उद्देश्य                 :-  पेंशन के प्रावधान वाली योजना (18-40 वर्ष आयु वर्ग के लिए)

Saturday, 17 April 2021

भारत के प्रमुख वाद्ययंत्र और उनके वादक

भारत के प्रमुख वाद्ययंत्र और उनके वादक
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सितार ➭ पं. रविशंकर, उमाशंकर मिश्र, बुद्धादित्य मुखर्जी, विलायत खां, शाहिद परवेज, वंदेहसन ।

सरोद  ➭ अमजद अली खां, अलाउद्दीन खां, अली अकबर खां, विश्वजीतराय चौधरी, मुकेश शर्मा, बुद्धदेवदास गुप्ता ।
संतूर

संतूर ➭ शिवकुमार शर्मा, भजन सोपारी 

शहनाई ➭ बिस्मिल्ला खां, अली अहमद, हुसेन खां, दयाशंकर जगन्नाथ ।

बाँसुरी ➭ हरिप्रसाद चौरसिया, पत्रालाल घोष, राजेन्द्र कुलकुणीं, वी. कुंजमणि ।

तबला ➭ जाकिर हुसैन, अल्ला रखा खां, गुदई महाराज, किशन महाराज, लतीफ खां, सुखविंदर सिंह ।

वायलिन ➭ टीएन. कृष्णन, डॉ. एन. राजम, एल. सुब्राह्मण्यम् ।

पखावज ➭ गोपाल दास, ठाकुर लक्ष्मण सिंह, छत्रपति सिंह, रहमान खां ।

रूद्रबीणा ➭ उस्ताद सादिक अली खां, असद अली खां ।

घटम ➭ टी०एच० विनायकराम, ई०एम० सुब्रमण्यम

वीणा ➭ एस. बालचंद्रन, कृष्ण भागवतार, बदरुद्दीन डागर ।
 
सारंगी ➭ शकूर खान, पंडित राम नारायण, रमेश मिश्रा, सुल्तान खान

मृदंग ➭ ठाकुर भीकम सिंह, जगदीश सिंह, पालधार रघु ।

Tuesday, 13 April 2021

चित्रकार रामकुमार

रामकुमार भारत के एक कलाकार और लेखक थे। भारत के सर्वश्रेष्ठ अमूर्त चित्रकारों में उनकी गणना होती है। 
जन्म की तारीख और समय: 23 सितंबर 1924हिमाचल प्रदेश
मृत्यु की जगह और तारीख: 14 अप्रैल 2018दिल्ली

पद्मभूषण से सम्मानित प्रख्यात चित्रकार एवं प्रसिद्ध लेखक रामकुमार का आज सुबह यहां अपने निवास पर निधन हो गया। वह 94 वर्ष के थे। उनके परिवार में एक पुत्र है जो ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं। उनका अंतिम संस्कार यहां निगमबोध घाट पर ढाई बजे दिन में किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश की राजधनी शिमला में 1924 में जन्मे रामकुमार हिंदी के मशहूर लेखक निर्मल वर्मा के बड़े भाई थे। 

प्रसिद्ध कला समीक्षक एवं रामकुमार के मित्र प्रयाग शुक्ल ने यूनीवार्ता को बताया कि राम कुमार पिछले 20 दिन से राजधानी के पटपडग़ंज इलाके में स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती थे। वह विश्व विख्यात चित्रकार एमएफ हुसैन, तैयब मेहता और सैयद हैदर रजा के आत्मीय मित्र थे। उनके निधन से आधुनिक भारतीय चित्रकला का एक प्रमुख स्तंभ ढह गया। प्रसिद्ध संस्कृति कमीज़् अशोक वाजपेयी, कला समीक्षक विनोद भारद्वाज, प्रसिद्ध लेखक गिरिधर राठी समेत कई लेखकों, चित्रकारों ने रामकुमार के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

सेंट स्टीफन कालेज से पढ़े रामकुमार ललित कला अकेडमी के फेलो भी थे। उनकी पेंटिंग हुसैन तैयब मेहता की तरह करोड़ो रुपये में बिकती थी। वह अपने अमूर्त चित्रों के लिए जाने जाते थे। उनकी अपनी अलग शैली थी। वह साठ के दशक के चर्चित कहानीकार भी थे। उनकी चित्रों की प्रदर्शनी दुनिया के कई देशों में लगी थी।
 कुछ लोगों का हर काम अनूठा होता है। रामकुमार उनमें से एक थे। कहानियां लिखीं तो अनूठी। चित्र बनाए तो अनूठे। वे एक जलते हुए मशाल की तरह थे, जिनकी रोशनी में कई कलाकारों ने अपने-अपने रास्ते देखे। रामकुमार नहीं रहे। कथा और कला की दुनिया में उनकी उपस्थिति ने परंपरा का निर्माण किया था। बनारस पर बनाए उनके चित्रों की लंबे समय तक चर्चा होती रही, लेकिन बाद के चित्रों में भी किसी देश या शहर की यात्रा का प्रभाव दिखता रहा। यह बात अलग है कि अमूर्त शैली की वजह से हमने उन चित्रों को किसी खास शहर से जोड़कर नहीं देखा। प्रकृति उनके बनाए चित्रों में एक अलग ढंग से आती रही। उन्होंने कभी प्रकृति का वास्तविक चित्रण तो नहीं किया, मगर अहसास हमेशा तीव्र रहा। चटकीले रंगों से बचते हुए जगहों का जैसा इंप्रेशन उनके कैनवस पर दिखता है, वह उन्हें दूसरों से अलग रखता है। इस

कथाकार-कलाकार के चित्रों की सबसे बड़ी विशेषता यही थी कि पाठक से संवाद में इनकी कला आत्मीय-सी लगती थी। उनके आकार संवाद की स्थिति बनाते रहे और उसमें हम संवेदना पाते रहे। वे संकोची स्वभाव के थे। अपनी रचनाओं पर खुद बात करने में उन्हें एक झिझक-सी होती थी, लेकिन कला पर बहस के पक्षधर थे। सर्दियों की सुबह उन्हें बहुत पसंद थी। कहते थे, "आकाश खुला-खुला लगता है, मुक्ति-सी महसूस होती है।" बरसों पेरिस में रहे।

छोटे भाई और मशहूर साहित्यकार निर्मल वर्मा के न रहने के बाद, कई बार की बातचीत में उनके अंदर एक खालीपन का अहसास होता था। हाल के दिनों में वह दिल्ली में रह रहे थे। उनके अब न रहने पर ऐसा लगता है, मानो एक ऐसा कलाकार चला गया, जिनकी आंखें और दिल हमेशा एक नए शहर की तलाश करते थे। 1924 में शिमला में जन्मे रामकुमार मशहूर लेखक निर्मल वर्मा के बड़े भाई थे। अपने समकालीन चित्रकारों एम.एफ. हुसैन, तैयब मेहता और सैयद हैदर रजा की तरह रामकुमार भी प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप से जुड़े हुए थे।

Friday, 2 April 2021

Bauddha sangitiya ,बौद्ध सगितिया

 बौद्ध संगीतियांः स्थान, अध्यक्ष, शासनकाल

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╭─❀⊰╯प्रथम बौद्ध संगीति”
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◎ स्थान ➛ राजगृह (सप्तपर्णी गुफा)
◎ समय ➛ 483 ई.पू.
◎ अध्यक्ष ➛ महाकस्सप
◎ शासनकाल ➛ अजातशत्रु (हर्यक वंश) के काल में ।
◎ उद्देश्य ➛ बुद्ध के उपदेशों को दो पिटकों विनय पिटक तथा सुत्त पिटक में संकलित किया गया।

╭─❀⊰╯“द्वितीय बौद्ध संगीति”
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◎ स्थान ➛ वैशाली
◎ समय ➛ 383 ई.पू.
◎ अध्यक्ष ➛ साबकमीर (सर्वकामनी)
◎ शासनकाल ➛ कालाशोक (शिशुनाग वंश) के शासनकाल में।
◎ उद्देश्य ➛ अनुशासन को लेकर मतभेद के समाधान के लिए बौद्ध धर्म स्थापित एवं महासांघिक दो भागों में बँट गया।

╭─❀⊰╯ “तृतीय बौद्ध संगीति”
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◎ स्थान ➛ पाटलिपुत्र
◎ समय ➛ 251 ई.पू.
◎ अध्यक्ष ➛ मोग्गलिपुत्ततिस्स
◎ शासनकाल ➛ अशोक (मौर्यवंश) के काल में।
◎ उद्देश्य ➛ संघ भेद के विरुद्ध कठोर नियमों का प्रतिपादन करके बौद्ध धर्म को स्थायित्व प्रदान करने का प्रयत्न किया गया। धर्म ग्रन्थों का अंतिम रूप से सम्पादन किया गया तथा तीसरा पिटक अभिधम्मपिटक जोङा गया।

╭─❀⊰╯ “चतुर्थ बौद्ध संगीति”
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◎ स्थान ➛ कश्मीर के कुण्डलवन
◎ समय ➛ प्रथम शता. ई.
◎ अध्यक्ष ➛ वसुमित्र
◎ उपाध्यक्ष ➛ अश्वघोष
◎ शासनकाल ➛ कनिष्क (कुषाण वंश) के काल में।
◎ उद्देश्य ➛ बौद्ध धर्म का
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Monday, 25 January 2021

Padma Awards 2021

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सोमवार को पद्म पुरस्कार 2021 का एलान कर दिया गया। इसके तहत किसी खास क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले नागरिकों को तीन श्रेणियों पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री से सम्मानित किया जाता है। जापान के पूर्व प्रधान मंत्री शिंजो आबे, बालासुब्रमण्यम (मरणोपरांत), सैंड कलाकार सुदर्शन साहू, पुरातत्वविद बीबी लाल को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है।

सूची : इस वर्ष इन सात लोगों को मिलेगा पद्म विभूषण

1. शिंजो आबे (जनसेवा, जापान)
जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे को जनसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों लिए पद्म विभूषण सम्मान दिया गया है। उनके कार्यकाल में भारत-जापान के बीच द्विपक्षीय संबंधों में काफी प्रगति हुई थी। आबे ने साल 2007 में जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच चतुर्भुज सुरक्षा वार्ता शुरू की थी। अगस्त 2007 में भारत की तीन दिवसीय यात्रा ने भारत और जापान के बीच मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों के लंबे इतिहास पर एक नए द्विपक्षीय एशियाई गठबंधन के लिए सहमति दी थी।

2. एसपी बालासुब्रमण्यम (मरणोपरांत) (कला, तमिलनाडु)
देश के प्रसिद्ध गायक एसपी बालासुब्रमण्यम ने 50 साल के गायकी करियर में तेलुगू, तमिल, कन्नड़, हिंदी और मलयालम में 40,000 से ज्यादा गाने गाए थे। बाला ने तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और हिंदी भाषा की 40 से ज्यादा फिल्मों में संगीत निर्देशक का काम भी किया। उन्हें 2001 में पद्मश्री और 2011 में पद्मभूषण से नवाजा जा चुका है। उनका निधन 25 सितंबर 2020 को हुआ।

3. डॉ. बेल्ले मोनप्पा हेगड़े (चिकित्सा, तमिलनाडु) 
डॉ. बेल्ले मोनप्पा हेगड़े कर्नाटक के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ हैं। वे शिक्षाविद, प्रेरक वक्ता और लेखक भी हैं। उन्होंने चिकित्सा पद्धति और नैतिकता पर कई किताबें लिखी हैं। उन्हें 2010 में पद्म भूषण अवॉर्ड दिया गया था।

4. नरिंदर सिंह कपानी (विज्ञान और प्रौद्योगिकी, यूएसए) 
भारतीय मूल के अमेरिकी भौतिक वैज्ञानिक हैं। उन्हें फोर्ब्स मैगजीन ने बिजनेसमैन ऑफ द सेंचुरी एडिशन में अनसंग हीरोज के तौर पर नामित किया था। उन्होंने ही 1956 में फाइबर ऑप्टिक्स शब्द ईजाद किया था। कपानी के शोध और आविष्कारों में फाइबर-ऑप्टिक्स संचार, लेजर, बायोमेडिकल इंस्ट्रूमेंटेशन, सौर ऊर्जा और प्रदूषण निगरानी शामिल हैं। उनके पास सौ से अधिक पेटेंट हैं और नेशनल इन्वेंटर्स काउंसिल के सदस्य थे।

5. मौलाना वहीदुद्दीन खान (अध्यात्म, दिल्ली)
दिल्ली में रहने वाले मौलाना वहीदुद्दीन खान का जन्म 1 जनवरी 1925 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में हुआ था। वे प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वान और शांति कार्यकर्ता हैं। उन्हें सोवियत संघ के दौर में राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव ने डेमिर्गुस पीस इंटरनेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया था। उन्हें 2000 में पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है। इन्होंने कुरान को सरल और समकालीन अंग्रेजी में अनुवाद किया है और कुरान पर एक टिप्पणी भी लिखा है और ये कई टेलीविजन चैनलों पर व्याख्यान देते रहते हैं। 

6. बीबी लाल (पुरातत्व, दिल्ली)
दिल्ली के प्रसिद्ध पुरातत्वविद बीबी लाल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक रह चुके हैं। उनकी किताब 'राम, उनकी ऐतिहासिकता, मंदिर और सेतु: साहित्य, पुरातत्व और अन्य विज्ञान' को लेकर खासी बहस हुई थी। इसमें विवादित ढांचे के नीचे मंदिर होने की बात कही गई थी। उन्हें पहले पद्म भूषण दिया जा चुका है।

7. सुदर्शन साहू (कला, ओडिशा)
ओडिशा के सुदर्शन साहू प्रसिद्ध मूर्तिकार हैं। वे पौराणिक कथाओं को रेत की मूर्तियों में ढालने में माहिर हैं। उनकी बनाई कलाकृतियों की प्रदर्शनी देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। उन्हें पहले पद्म श्री से सम्मानित किया जा चुका है। वे अक्सर क्रिकेट मैच के दौरान खिलाड़ियों के भी चित्र उकेरते थे।

सूची : इन्हें मिलेगा पद्म भूषण

 

नामक्षेत्रराज्य
कृष्णन नायर शांताकुमारीकलाकेरल
तरूण गोगोई (मरणोपरांत)जनसेवाअसम
चंद्रशेखर कंबारासाहित्य और शिक्षाकर्नाटक
सुमित्रा महाजनजनसेवामध्य प्रदेश
नृपेंद्र मिश्रलोक सेवाउत्तर प्रदेश
रामविलास पासवानजनसेवाबिहार
केशुभाई पटेलजनसेवागुजरात
कल्बे सादिकधर्मउत्तर प्रदेश
रजनीकांत देवदास श्रॉफव्यापार उद्योगमहाराष्ट्र
तरलोचन सिंहजनसेवाहरियाणा

सूची : इन्हें मिलेगा पद्मश्री सम्मान

 

नामक्षेत्रराज्य
गुलफाम अहमदकलाउत्तर प्रदेश
पी अनीताखेलतमिलनाडु
रामास्वामी अन्ना वरापूकलाआंध्र प्रदेश
सुब्बू अरूमुगमकलातमिलनाडु
प्रकाशराव आशावादीसाहित्य और शिक्षाआंध्र प्रदेश
भूरी बाईकलामध्य प्रदेश
राधेश्याम बरलेकलाछत्तीसगढ़
धर्म नारायण बर्मासाहित्य और शिक्षापश्चिम बंगाल
लक्ष्मी बरुआसमाज सेवा

असम

बीरेंद्र कुमार बसककला

पश्चिम बंगाल

रजनी बेक्टरव्यापार उद्योगपंजाब
पीटर ब्रूककलायूनाइटेड किंग्डम
संगखुमी बुकालच्वाकसमाज सेवामिजोरम
गोपीराम बरगायन बुराभकतकलाअसम
बिजोय चक्रवर्तीजनसेवाअसम
सुजीत चट्टोपाध्यायसाहित्य और शिक्षापश्चिम बंगाल
जगदीश चौधरी (मरणोपरांत)समाज सेवाउत्तर प्रदेश
सुल्ट्रीम चोनजोरसमाज सेवालद्दाख
माउमा दासखेलपश्चिम बंगाल
श्रीकांत दतरसाहित्य और शिक्षायूएसए
नारायण देबनाथकलापश्चिम बंगाल
चुटनी देवीसमाज सेवाझारखंड
दुलारी देवीकलाबिहार
राधे देवीकलामणिपुर
शांति देवीसमाज सेवाओडिशा
वयन डिबियाकलाइंडोनेशिया
दादूदन गढ़वीसाहित्य और शिक्षागुजरात
परशुराम आत्मराम गंगावनेकलामहाराष्ट्र
जय भगवान गोयलसाहित्य और शिक्षाहरियाणा
जगदीश चंद्र हलदरसाहित्य और शिक्षापश्चिम बंगाल
मंगल सिंहसाहित्य और शिक्षाअसम
अंशु जम्सेनपाखेलअरुणाचल प्रदेश
पुर्णमासी जानीकलाओडिशा
माथा बी मंजम्मा जोगातीकलाकर्नाटक
दामोदरन कैथा प्रामकलाकेरल
नाम देव सी कांब्लेसाहित्य और शिक्षामहाराष्ट्र
महेश भाई और नरेश भाई कनोडिया (मरणोपरांत)कलागुजरात
रजत कुमारसाहित्य और शिक्षाओडिशा
रंगास्वामी लक्ष्मीनारायण कश्यपसाहित्य और शिक्षाकर्नाटक
प्रकाश कौरसमाज सेवापंजाब
निकोलस कजानससाहित्य और शिक्षाग्रीस
के केशव सामीकलापुडुचेरी
गुलाम रसूल खानकलाजम्मू कश्मीर
लाखा खानकलाराजस्थान
संजीदा खातूनकलाबांग्लादेश
विनायक विष्णु खेडेकरकला

गोवा

नीरु कुमारसमाज सेवादिल्ली
लाजवंतीकलापंजाब
रतन लालविज्ञान और अभियांत्रिकीUSA
अली मानिकफननवोन्मेषलक्षद्वीप
रामचंद्र मांझीकलाबिहार
दुलाल मंकीकलाअसम
नानाद्रो बी मारककृषिमेघालय
रेवबेन माशांग्वाकलामणिपुर
चंद्रकांत मेहतासाहित्य और शिक्षागुजरात
रतनलाल मित्तलचिकित्सापंजाब
माधवन नामबियारखेलकेरल
श्याम सुंदर पालीवालसमाज सेवाराजस्थान
चंद्रकांत शांभाजी पांडवचिकित्सादिल्ली
सोलोमान पप्पायासाहित्य, शिक्षा, पत्रकारितातमिलनाडु
पप्पामलकृषितमिलनाडु
कृष्ण मोहन पाथीचिकित्साओडिशा
जसवंती बेन जमुनादास पोपटव्यापार उद्योगमहाराष्ट्र
गिरीश प्रभोनेसमाज सेवामहाराष्ट्र
नंदा प्रस्टीसाहित्य और शिक्षाओडिशा
केके रामचंद्र पुलावरकलाकेरल
बालन पुथेरीसाहित्य और शिक्षाकेरल
बिरुबाला राभासमाज सेवाअसम
कनक राजूकलातेलंगाना
बॉम्बेजयश्री रामनाथकलातमिलनाडु
सत्याराम रियांगकलात्रिपुरा
धनंजय दिवाकर सचदेवचिकित्साकेरल
अशोक कुमार साहूचिकित्साउत्तर प्रदेश
भूपेंद्र कुमार सिंह संजयचिकित्साउत्तराखंड
सिंधु ताई सपकालसमाज सेवामहाराष्ट्र
चमनलाल सप्रू (मरणोपरांत)साहित्य और शिक्षाजम्मू
रोमन शर्मासाहित्य, शिक्षा, पत्रकारिताअसम
इमरान शाहसाहित्य और शिक्षा असम
प्रेमचंद्र शर्माकृषिउत्तराखंड
अर्जुन सिंह शेखावतसाहित्य और शिक्षाराजस्थान
रामयत्न शुक्लासाहित्य और शिक्षाउत्तर प्रदेश
जितेंद्र सिंह शंटीसमाज सेवादिल्ली
करतार पारस राम सिंहकलाहिमाचल प्रदेश
करतार सिंहकलापंजाब
दिलीप कुमार सिंहचिकित्साबिहार
चंद्रशेखर सिंहकृषिउत्तर प्रदेश
सुधा हरिनारायण सिंहखेलउत्तर प्रदेश
बीरेंद्र सिंहखेलहरियाणा
मृदुला सिन्हा (मरणोपरांत)साहित्य और शिक्षाबिहार
केसी शिवशंकर (मरणोपरांत)कलातमिलनाडु
गुरुमां कमलीसोरेनसमाज सेवापश्चिम बंगाल
माराची शुब्बूरमनसमाज सेवातमिलनाडु
पी सुब्रमण्यन (मरणोपरांत)व्यापार उद्योगतमिलनाडु
नीदूमोलू सुमतीकलाआंध्र प्रदेश
कपिल तिवारीसाहित्य और शिक्षामध्य प्रदेश
फॉदर वॉल्स (मरणोपरांत)साहित्य और शिक्षास्पेन
थिरूवेंगदम वीरा राघवनचिकित्सातमिलनाडु
श्रीधर वेंबूव्यापार उद्योगतमिलनाडु
के वाई वेंकटेशखेलकर्नाटक
उषा यादवसाहित्य और शिक्षाउत्तर प्रदेश
कर्नल काजी सज्जाद अली जाहिरजनसेवाबांग्लादेश




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दुनिया की सबसे बड़ी गुफा,

दुनिया में कई तरह की गुफाएं मौजूद हैं और हर गुफाओं की अपनी खासियत भी है। लेकिन क्या आपको ये पता है कि दुनिया में सबसे बड़ी गुफा कौन सी है और कहां स्थित है? यह गुफा इतनी बड़ी है, जिसमें कई इमारतें बनाई जा सकती हैं, वो भी 40 मंजिला तक। दरअसल, इस गुफा का नाम 'सोन डोंग' है, जो मध्य वियतनाम के जंगलों में स्थित है।
सोन डोंग गुफा की कुल लंबाई 9 किलोमीटर है, और इसमें लगभग 150 अलग-अलग गुफाएं हैं। इस गुफा के अंदर पेड़-पौधों से लेकर जंगल, बादल और नदी तक सबकुछ हैं। लाखों साल पुरानी इस गुफा को साल 2013 में पहली बार पर्यटकों के लिए खोला गया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि हर साल सिर्फ 250-300 लोगों को ही यहां जाने की इजाजत मिलती है।


इस गुफा की खोज साल 1991 में 'हो खानह' नाम के स्थानीय शख्स ने की थी, लेकिन उस वक्त पानी की भयंकर गर्जना और गुफा में घोर अंधेरा होने के कारण कोई भी अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साल 2009 में इस गुफा को पहचान मिली, जब एक ब्रिटिश रिसर्च एसोसिएशन ने पहली बार दुनिया को इस गुफा की झलक दिखाई। बाद में साल 2010 में वैज्ञानिकों ने एक 200 मीटर ऊंची दीवार, जिसे 'वियतनाम की दीवार' भी कहते हैं, को पार कर गुफा के अंदर जाने के रास्ते का पता लगाया।

हर साल पर्यटक अगस्त महीने से पहले ही इस गुफा के अंदर जाकर फिर लौट आते हैं, क्योंकि इसके बाद गुफा के अंदर मौजूद नदी का जलस्तर बढ़ जाता है। गुफा के अंदर जाने के लिए प्रति व्यक्ति टिकट लगभग दो लाख रुपये का आता है।
गुफा के अंदर जाने वाले पर्यटकों को पहले छह महीने की ट्रेनिंग दी जाती है। उन्हें कम से कम 10 किलोमीटर पैदल चलने और छह बार रॉक क्लाइंबिंग यानी चट्टानों पर चढ़ना सिखाया जाता है। इसके बाद ही उन्हें गुफा में ले जाया जाता है।


मधुबनी की मिथिला पेंटिंग कलाकार दुलारी देवी को मिलेगा पद्मश्री

मिथिला पेंटिंग कलाकार दुलारी देवी को पद्मश्री सम्मान से सम्मनित किया जाएगा। बिहार के मधुबनी जिले के रांटी गांव की रहने वाली दुलारी देवी को गृह मंत्रालय से फोन के माध्यम इसकी सूचना दी गई है। मिथिला पेंटिग की यह कलाकार पढ़ी-लिखी नहीं हैं। बड़ी मुश्किल से हस्ताक्षर और अपने गांव का नाम भर लिख लेती हैं। मगर, इनके कला-कौशल की चर्चा कला जगत की नामचीन पत्र-पत्रिकाओं तक में होती है। इनके मुरीदों में कई बड़े नाम शामिल हैं। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भी इनमें से एक थे। 
54 वर्षीय दुलारी देवी की संघर्ष गाथा प्रेरणा देती है। मधुबनी जिले के राजनगर प्रखंड के रांटी गांव निवासी दुलारी मल्लाह जाति के एक अत्यंत निर्धन परिवार में जन्मीं और बचपन से ही कठिन संघर्ष का सामना करती रहीं। 12 साल की उम्र में शादी हो गई। सात साल ससुराल में बिताए। फिर छह माह की पुत्री की अचानक मौत के बाद मायके आईं और यहीं रह गईं। दुलारी के पास घरों में झाड़ू-पोंछा कर जीविका चलाने के सिवा कोई और विकल्प नहीं था। 

गांव के ही मिथिला पेंटिंग की ख्यातिलब्ध कलाकार कर्पूरी देवी के घर उन्हें झाड़ू-पोंछा का काम मिला। इस दौरान फुर्सत के समय में दुलारी अपने घर-आंगन को माटी से पोतकर, लकड़ी की कूची बना कल्पनाओं को आकृति देने लगीं। कर्पूरी देवी का साथ पाकर दुलारी ने मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली। दुलारी अब तक सात हजार मिथिला पेंटिंग विविध विषयों पर बना चुकी हैं। 2012-13 में दुलारी राज्य पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं। 

गीता वुल्फ की पुस्तक 'फॉलोइंग माइ पेंट ब्रश' और मार्टिन लि कॉज की फ्रेंच में लिखी पुस्तक मिथिला में दुलारी की जीवन गाथा व कलाकृतियां सुसज्जित हैं। सतरंगी नामक पुस्तक में भी इनकी पेंटिग ने जगह पाई है। इग्नू के लिए मैथिली में तैयार किए गए आधार पाठ्यक्रम के मुखपृष्ठ के लिए भी इनकी पेंटिग चुनी गई। पटना में बिहार संग्रहालय के उद्घाटन के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दुलारी देवी को विशेष तौर पर आमंत्रित किया। वहां कमला नदी की पूजा पर इनकी बनाई एक पेंटिग को जगह दी गई है।

गांव के ही मिथिला पेंटिंग की ख्यातिलब्ध कलाकार कर्पूरी देवी के घर उन्हें झाड़ू-पोंछा का काम मिला। इस दौरान फुर्सत के समय में दुलारी अपने घर-आंगन को माटी से पोतकर, लकड़ी की कूची बना कल्पनाओं को आकृति देने लगीं। कर्पूरी देवी का साथ पाकर दुलारी ने मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली। दुलारी अब तक सात हजार मिथिला पेंटिंग विविध विषयों पर बना चुकी हैं। 2012-13 में दुलारी राज्य पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं। 

गीता वुल्फ की पुस्तक 'फॉलोइंग माइ पेंट ब्रश' और मार्टिन लि कॉज की फ्रेंच में लिखी पुस्तक मिथिला में दुलारी की जीवन गाथा व कलाकृतियां सुसज्जित हैं। सतरंगी नामक पुस्तक में भी इनकी पेंटिग ने जगह पाई है। इग्नू के लिए मैथिली में तैयार किए गए आधार पाठ्यक्रम के मुखपृष्ठ के लिए भी इनकी पेंटिग चुनी गई। पटना में बिहार संग्रहालय के उद्घाटन के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दुलारी देवी को विशेष तौर पर आमंत्रित किया। वहां कमला नदी की पूजा पर इनकी बनाई एक पेंटिग को जगह दी गई है।

गांव के ही मिथिला पेंटिंग की ख्यातिलब्ध कलाकार कर्पूरी देवी के घर उन्हें झाड़ू-पोंछा का काम मिला। इस दौरान फुर्सत के समय में दुलारी अपने घर-आंगन को माटी से पोतकर, लकड़ी की कूची बना कल्पनाओं को आकृति देने लगीं। कर्पूरी देवी का साथ पाकर दुलारी ने मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली। दुलारी अब तक सात हजार मिथिला पेंटिंग विविध विषयों पर बना चुकी हैं। 2012-13 में दुलारी राज्य पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं। 

गीता वुल्फ की पुस्तक 'फॉलोइंग माइ पेंट ब्रश' और मार्टिन लि कॉज की फ्रेंच में लिखी पुस्तक मिथिला में दुलारी की जीवन गाथा व कलाकृतियां सुसज्जित हैं। सतरंगी नामक पुस्तक में भी इनकी पेंटिग ने जगह पाई है। इग्नू के लिए मैथिली में तैयार किए गए आधार पाठ्यक्रम के मुखपृष्ठ के लिए भी इनकी पेंटिग चुनी गई। पटना में बिहार संग्रहालय के उद्घाटन के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दुलारी देवी को विशेष तौर पर आमंत्रित किया। वहां कमला नदी की पूजा पर इनकी बनाई एक पेंटिग को जगह दी गई है।



Wednesday, 20 January 2021

पुस्तक व उसके रचयिता


1-अष्टाध्यायी               पाणिनी
2-रामायण                    वाल्मीकि
3-महाभारत                  वेदव्यास
4-अर्थशास्त्र                  चाणक्य
5-महाभाष्य                  पतंजलि
6-सत्सहसारिका सूत्र      नागार्जुन
7-बुद्धचरित                  अश्वघोष
8-सौंदरानन्द                 अश्वघोष
9-महाविभाषाशास्त्र        वसुमित्र
10- स्वप्नवासवदत्ता        भास
11-कामसूत्र                  वात्स्यायन
12-कुमारसंभवम्           कालिदास
13-अभिज्ञानशकुंतलम्    कालिदास  
14-विक्रमोउर्वशियां        कालिदास
15-मेघदूत                    कालिदास
16-रघुवंशम्                  कालिदास
17-मालविकाग्निमित्रम्   कालिदास
18-नाट्यशास्त्र              भरतमुनि
19-देवीचंद्रगुप्तम          विशाखदत्त
20-मृच्छकटिकम्          शूद्रक
21-सूर्य सिद्धान्त           आर्यभट्ट
22-वृहतसिंता               बरामिहिर
23-पंचतंत्र।                  विष्णु शर्मा
24-कथासरित्सागर        सोमदेव
25-अभिधम्मकोश         वसुबन्धु
26-मुद्राराक्षस               विशाखदत्त
27-रावणवध।              भटिट
28-किरातार्जुनीयम्       भारवि
29-दशकुमारचरितम्     दंडी
30-हर्षचरित                वाणभट्ट
31-कादंबरी                वाणभट्ट
32-वासवदत्ता             सुबंधु
33-नागानंद                हर्षवधन
34-रत्नावली               हर्षवर्धन
35-प्रियदर्शिका            हर्षवर्धन
36-मालतीमाधव         भवभूति
37-पृथ्वीराज विजय     जयानक
38-कर्पूरमंजरी            राजशेखर
39-काव्यमीमांसा         राजशेखर
40-नवसहसांक चरित   पदम् गुप्त
41-शब्दानुशासन         राजभोज
42-वृहतकथामंजरी      क्षेमेन्द्र
43-नैषधचरितम           श्रीहर्ष
44-विक्रमांकदेवचरित   बिल्हण
45-कुमारपालचरित      हेमचन्द्र
46-गीतगोविन्द            जयदेव
47-पृथ्वीराजरासो         चंदरवरदाई
48-राजतरंगिणी           कल्हण
49-रासमाला               सोमेश्वर
50-शिशुपाल वध          माघ
51-गौडवाहो                वाकपति
52-रामचरित                सन्धयाकरनंदी
53-द्वयाश्रय काव्य         हेमचन्द्र

वेद-ज्ञान:-

प्र.1-  वेद किसे कहते है ?
उत्तर-  ईश्वरीय ज्ञान की पुस्तक को वेद कहते है।

प्र.2-  वेद-ज्ञान किसने दिया ?
उत्तर-  ईश्वर ने दिया।

प्र.3-  ईश्वर ने वेद-ज्ञान कब दिया ?
उत्तर-  ईश्वर ने सृष्टि के आरंभ में वेद-ज्ञान दिया।

प्र.4-  ईश्वर ने वेद ज्ञान क्यों दिया ?
उत्तर- मनुष्य-मात्र के कल्याण         के लिए।

प्र.5-  वेद कितने है ?
उत्तर- चार ।                                                  
1-ऋग्वेद 
2-यजुर्वेद  
3-सामवेद
4-अथर्ववेद

प्र.6-  वेदों के ब्राह्मण ।
        वेद              ब्राह्मण
1 - ऋग्वेद      -     ऐतरेय
2 - यजुर्वेद      -     शतपथ
3 - सामवेद     -    तांड्य
4 - अथर्ववेद   -   गोपथ

प्र.7-  वेदों के उपवेद कितने है।
उत्तर -  चार।
      वेद                     उपवेद
    1- ऋग्वेद       -     आयुर्वेद
    2- यजुर्वेद       -    धनुर्वेद
    3 -सामवेद      -     गंधर्ववेद
    4- अथर्ववेद    -     अर्थवेद

प्र 8-  वेदों के अंग हैं ।
उत्तर -  छः ।
1 - शिक्षा
2 - कल्प
3 - निरूक्त
4 - व्याकरण
5 - छंद
6 - ज्योतिष

प्र.9- वेदों का ज्ञान ईश्वर ने किन किन ऋषियो को दिया ?
उत्तर- चार ऋषियों को।
         वेद                ऋषि
1- ऋग्वेद         -      अग्नि
2 - यजुर्वेद       -       वायु
3 - सामवेद      -      आदित्य
4 - अथर्ववेद    -     अंगिरा

प्र.10-  वेदों का ज्ञान ईश्वर ने ऋषियों को कैसे दिया ?
उत्तर- समाधि की अवस्था में।

प्र.11-  वेदों में कैसे ज्ञान है ?
उत्तर-  सब सत्य विद्याओं का ज्ञान-विज्ञान।

प्र.12-  वेदो के विषय कौन-कौन से हैं ?
उत्तर-   चार ।
        ऋषि        विषय
1-  ऋग्वेद    -    ज्ञान
2-  यजुर्वेद    -    कर्म
3-  सामवे     -    उपासना
4-  अथर्ववेद -    विज्ञान

प्र.13-  वेदों में।

ऋग्वेद में।
1-  मंडल      -  10
2 - अष्टक     -   08
3 - सूक्त        -  1028
4 - अनुवाक  -   85 
5 - ऋचाएं     -  10589

यजुर्वेद में।
1- अध्याय    -  40
2- मंत्र           - 1975

सामवेद में।
1-  आरचिक   -  06
2 - अध्याय     -   06
3-  ऋचाएं       -  1875

अथर्ववेद में।
1- कांड      -    20
2- सूक्त      -   731
3 - मंत्र       -   5977
          
प्र.14-  वेद पढ़ने का अधिकार किसको है ?                                                                                                                                                              उत्तर-  मनुष्य-मात्र को वेद पढ़ने का अधिकार है।

प्र.15-  क्या वेदों में मूर्तिपूजा का विधान है ?
उत्तर-  बिलकुल भी नहीं।

प्र.16-  क्या वेदों में अवतारवाद का प्रमाण है ?
उत्तर-  नहीं।

प्र.17-  सबसे बड़ा वेद कौन-सा है ?
उत्तर-  ऋग्वेद।

प्र.18-  वेदों की उत्पत्ति कब हुई ?
उत्तर-  वेदो की उत्पत्ति सृष्टि के आदि से परमात्मा द्वारा हुई । अर्थात 1 अरब 96 करोड़ 8 लाख 43 हजार वर्ष पूर्व । 

प्र.19-  वेद-ज्ञान के सहायक दर्शन-शास्त्र ( उपअंग ) कितने हैं और उनके लेखकों का क्या नाम है ?
उत्तर- 
1-  न्याय दर्शन  - गौतम मुनि।
2- वैशेषिक दर्शन  - कणाद मुनि।
3- योगदर्शन  - पतंजलि मुनि।
4- मीमांसा दर्शन  - जैमिनी मुनि।
5- सांख्य दर्शन  - कपिल मुनि।
6- वेदांत दर्शन  - व्यास मुनि।

प्र.20-  शास्त्रों के विषय क्या है ?
उत्तर-  आत्मा,  परमात्मा, प्रकृति,  जगत की उत्पत्ति,  मुक्ति अर्थात सब प्रकार का भौतिक व आध्यात्मिक  ज्ञान-विज्ञान आदि।

प्र.21-  प्रामाणिक उपनिषदे कितनी है ?
उत्तर-  केवल ग्यारह।

प्र.22-  उपनिषदों के नाम बतावे ?
उत्तर-  
01-ईश ( ईशावास्य )  
02-केन  
03-कठ  
04-प्रश्न  
05-मुंडक  
06-मांडू  
07-ऐतरेय  
08-तैत्तिरीय 
09-छांदोग्य 
10-वृहदारण्यक 
11-श्वेताश्वतर ।

प्र.23-  उपनिषदों के विषय कहाँ से लिए गए है ?
उत्तर- वेदों से।
प्र.24- चार वर्ण।
उत्तर- 
1- ब्राह्मण
2- क्षत्रिय
3- वैश्य
4- शूद्र

प्र.25- चार युग।
1- सतयुग - 17,28000  वर्षों का नाम ( सतयुग ) रखा है।
2- त्रेतायुग- 12,96000  वर्षों का नाम ( त्रेतायुग ) रखा है।
3- द्वापरयुग- 8,64000  वर्षों का नाम है।
4- कलयुग- 4,32000  वर्षों का नाम है।
कलयुग के 5122  वर्षों का भोग हो चुका है अभी तक।
4,27024 वर्षों का भोग होना है। 

पंच महायज्ञ
       1- ब्रह्मयज्ञ   
       2- देवयज्ञ
       3- पितृयज्ञ
       4- बलिवैश्वदेवयज्ञ
       5- अतिथियज्ञ
   
स्वर्ग  -  जहाँ सुख है।
नरक  -  जहाँ दुःख है।.

*#भगवान_शिव के  "35" रहस्य!!!!!!!!

भगवान शिव अर्थात पार्वती के पति शंकर जिन्हें महादेव, भोलेनाथ, आदिनाथ आदि कहा जाता है।

*🔱1. आदिनाथ शिव : -* सर्वप्रथम शिव ने ही धरती पर जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया इसलिए उन्हें 'आदिदेव' भी कहा जाता है। 'आदि' का अर्थ प्रारंभ। आदिनाथ होने के कारण उनका एक नाम 'आदिश' भी है।

*🔱2. शिव के अस्त्र-शस्त्र : -* शिव का धनुष पिनाक, चक्र भवरेंदु और सुदर्शन, अस्त्र पाशुपतास्त्र और शस्त्र त्रिशूल है। उक्त सभी का उन्होंने ही निर्माण किया था।

*🔱3. भगवान शिव का नाग : -* शिव के गले में जो नाग लिपटा रहता है उसका नाम वासुकि है। वासुकि के बड़े भाई का नाम शेषनाग है।

*🔱4. शिव की अर्द्धांगिनी : -* शिव की पहली पत्नी सती ने ही अगले जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लिया और वही उमा, उर्मि, काली कही गई हैं।

*🔱5. शिव के पुत्र : -* शिव के प्रमुख 6 पुत्र हैं- गणेश, कार्तिकेय, सुकेश, जलंधर, अयप्पा और भूमा। सभी के जन्म की कथा रोचक है।

*🔱6. शिव के शिष्य : -* शिव के 7 शिष्य हैं जिन्हें प्रारंभिक सप्तऋषि माना गया है। इन ऋषियों ने ही शिव के ज्ञान को संपूर्ण धरती पर प्रचारित किया जिसके चलते भिन्न-भिन्न धर्म और संस्कृतियों की उत्पत्ति हुई। शिव ने ही गुरु और शिष्य परंपरा की शुरुआत की थी। शिव के शिष्य हैं- बृहस्पति, विशालाक्ष, शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज इसके अलावा 8वें गौरशिरस मुनि भी थे।

*🔱7. शिव के गण : -* शिव के गणों में भैरव, वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, जय और विजय प्रमुख हैं। इसके अलावा, पिशाच, दैत्य और नाग-नागिन, पशुओं को भी शिव का गण माना जाता है। 

*🔱8. शिव पंचायत : -* भगवान सूर्य, गणपति, देवी, रुद्र और विष्णु ये शिव पंचायत कहलाते हैं।

*🔱9. शिव के द्वारपाल : -* नंदी, स्कंद, रिटी, वृषभ, भृंगी, गणेश, उमा-महेश्वर और महाकाल।

*🔱10. शिव पार्षद : -* जिस तरह जय और विजय विष्णु के पार्षद हैं उसी तरह बाण, रावण, चंड, नंदी, भृंगी आदि शिव के पार्षद हैं।

*🔱11. सभी धर्मों का केंद्र शिव : -* शिव की वेशभूषा ऐसी है कि प्रत्येक धर्म के लोग उनमें अपने प्रतीक ढूंढ सकते हैं। मुशरिक, यजीदी, साबिईन, सुबी, इब्राहीमी धर्मों में शिव के होने की छाप स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। शिव के शिष्यों से एक ऐसी परंपरा की शुरुआत हुई, जो आगे चलकर शैव, सिद्ध, नाथ, दिगंबर और सूफी संप्रदाय में वि‍भक्त हो गई।

*🔱12. बौद्ध साहित्य के मर्मज्ञ अंतरराष्ट्रीय : -*  ख्यातिप्राप्त विद्वान प्रोफेसर उपासक का मानना है कि शंकर ने ही बुद्ध के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने पालि ग्रंथों में वर्णित 27 बुद्धों का उल्लेख करते हुए बताया कि इनमें बुद्ध के 3 नाम अतिप्राचीन हैं- तणंकर, शणंकर और मेघंकर।

*🔱13. देवता और असुर दोनों के प्रिय शिव : -* भगवान शिव को देवों के साथ असुर, दानव, राक्षस, पिशाच, गंधर्व, यक्ष आदि सभी पूजते हैं। वे रावण को भी वरदान देते हैं और राम को भी। उन्होंने भस्मासुर, शुक्राचार्य आदि कई असुरों को वरदान दिया था। शिव, सभी आदिवासी, वनवासी जाति, वर्ण, धर्म और समाज के सर्वोच्च देवता हैं।

*🔱14. शिव चिह्न : -* वनवासी से लेकर सभी साधारण व्‍यक्ति जिस चिह्न की पूजा कर सकें, उस पत्‍थर के ढेले, बटिया को शिव का चिह्न माना जाता है। इसके अलावा रुद्राक्ष और त्रिशूल को भी शिव का चिह्न माना गया है। कुछ लोग डमरू और अर्द्ध चन्द्र को भी शिव का चिह्न मानते हैं, हालांकि ज्यादातर लोग शिवलिंग अर्थात शिव की ज्योति का पूजन करते हैं।

*🔱15. शिव की गुफा : -* शिव ने भस्मासुर से बचने के लिए एक पहाड़ी में अपने त्रिशूल से एक गुफा बनाई और वे फिर उसी गुफा में छिप गए। वह गुफा जम्मू से 150 किलोमीटर दूर त्रिकूटा की पहाड़ियों पर है। दूसरी ओर भगवान शिव ने जहां पार्वती को अमृत ज्ञान दिया था वह गुफा 'अमरनाथ गुफा' के नाम से प्रसिद्ध है।

*🔱16. शिव के पैरों के निशान : -* श्रीपद- श्रीलंका में रतन द्वीप पहाड़ की चोटी पर स्थित श्रीपद नामक मंदिर में शिव के पैरों के निशान हैं। ये पदचिह्न 5 फुट 7 इंच लंबे और 2 फुट 6 इंच चौड़े हैं। इस स्थान को सिवानोलीपदम कहते हैं। कुछ लोग इसे आदम पीक कहते हैं।

रुद्र पद- तमिलनाडु के नागपट्टीनम जिले के थिरुवेंगडू क्षेत्र में श्रीस्वेदारण्येश्‍वर का मंदिर में शिव के पदचिह्न हैं जिसे 'रुद्र पदम' कहा जाता है। इसके अलावा थिरुवन्नामलाई में भी एक स्थान पर शिव के पदचिह्न हैं।

तेजपुर- असम के तेजपुर में ब्रह्मपुत्र नदी के पास स्थित रुद्रपद मंदिर में शिव के दाएं पैर का निशान है।

जागेश्वर- उत्तराखंड के अल्मोड़ा से 36 किलोमीटर दूर जागेश्वर मंदिर की पहाड़ी से लगभग साढ़े 4 किलोमीटर दूर जंगल में भीम के पास शिव के पदचिह्न हैं। पांडवों को दर्शन देने से बचने के लिए उन्होंने अपना एक पैर यहां और दूसरा कैलाश में रखा था।

रांची- झारखंड के रांची रेलवे स्टेशन से 7 किलोमीटर की दूरी पर 'रांची हिल' पर शिवजी के पैरों के निशान हैं। इस स्थान को 'पहाड़ी बाबा मंदिर' कहा जाता है।

*🔱17. शिव के अवतार : -* वीरभद्र, पिप्पलाद, नंदी, भैरव, महेश, अश्वत्थामा, शरभावतार, गृहपति, दुर्वासा, हनुमान, वृषभ, यतिनाथ, कृष्णदर्शन, अवधूत, भिक्षुवर्य, सुरेश्वर, किरात, सुनटनर्तक, ब्रह्मचारी, यक्ष, वैश्यानाथ, द्विजेश्वर, हंसरूप, द्विज, नतेश्वर आदि हुए हैं। वेदों में रुद्रों का जिक्र है। रुद्र 11 बताए जाते हैं- कपाली, पिंगल, भीम, विरुपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, आपिर्बुध्य, शंभू, चण्ड तथा भव।

*🔱18. शिव का विरोधाभासिक परिवार : -* शिवपुत्र कार्तिकेय का वाहन मयूर है, जबकि शिव के गले में वासुकि नाग है। स्वभाव से मयूर और नाग आपस में दुश्मन हैं। इधर गणपति का वाहन चूहा है, जबकि सांप मूषकभक्षी जीव है। पार्वती का वाहन शेर है, लेकिन शिवजी का वाहन तो नंदी बैल है। इस विरोधाभास या वैचारिक भिन्नता के बावजूद परिवार में एकता है।

*🔱19.*  ति‍ब्बत स्थित कैलाश पर्वत पर उनका निवास है। जहां पर शिव विराजमान हैं उस पर्वत के ठीक नीचे पाताल लोक है जो भगवान विष्णु का स्थान है। शिव के आसन के ऊपर वायुमंडल के पार क्रमश: स्वर्ग लोक और फिर ब्रह्माजी का स्थान है।

*🔱20.शिव भक्त : -* ब्रह्मा, विष्णु और सभी देवी-देवताओं सहित भगवान राम और कृष्ण भी शिव भक्त है। हरिवंश पुराण के अनुसार, कैलास पर्वत पर कृष्ण ने शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी। भगवान राम ने रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना की थी।

*🔱21.शिव ध्यान : -* शिव की भक्ति हेतु शिव का ध्यान-पूजन किया जाता है। शिवलिंग को बिल्वपत्र चढ़ाकर शिवलिंग के समीप मंत्र जाप या ध्यान करने से मोक्ष का मार्ग पुष्ट होता है।

*🔱22.शिव मंत्र : -* दो ही शिव के मंत्र हैं पहला- ॐ नम: शिवाय। दूसरा महामृत्युंजय मंत्र- ॐ ह्रौं जू सः। ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जू ह्रौं ॐ ॥ है।

*🔱23.शिव व्रत और त्योहार : -* सोमवार, प्रदोष और श्रावण मास में शिव व्रत रखे जाते हैं। शिवरात्रि और महाशिवरात्रि शिव का प्रमुख पर्व त्योहार है।

*🔱24.शिव प्रचारक : -* भगवान शंकर की परंपरा को उनके शिष्यों बृहस्पति, विशालाक्ष (शिव), शुक्र, सहस्राक्ष, महेन्द्र, प्राचेतस मनु, भरद्वाज, अगस्त्य मुनि, गौरशिरस मुनि, नंदी, कार्तिकेय, भैरवनाथ आदि ने आगे बढ़ाया। इसके अलावा वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, नंदी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, बाण, रावण, जय और विजय ने भी शैवपंथ का प्रचार किया। इस परंपरा में सबसे बड़ा नाम आदिगुरु भगवान दत्तात्रेय का आता है। दत्तात्रेय के बाद आदि शंकराचार्य, मत्स्येन्द्रनाथ और गुरु गुरुगोरखनाथ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

*🔱25.शिव महिमा : -* शिव ने कालकूट नामक विष पिया था जो अमृत मंथन के दौरान निकला था। शिव ने भस्मासुर जैसे कई असुरों को वरदान दिया था। शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था। शिव ने गणेश और राजा दक्ष के सिर को जोड़ दिया था। ब्रह्मा द्वारा छल किए जाने पर शिव ने ब्रह्मा का पांचवां सिर काट दिया था।

*🔱26.शैव परम्परा : -* दसनामी, शाक्त, सिद्ध, दिगंबर, नाथ, लिंगायत, तमिल शैव, कालमुख शैव, कश्मीरी शैव, वीरशैव, नाग, लकुलीश, पाशुपत, कापालिक, कालदमन और महेश्वर सभी शैव परंपरा से हैं। चंद्रवंशी, सूर्यवंशी, अग्निवंशी और नागवंशी भी शिव की परंपरा से ही माने जाते हैं। भारत की असुर, रक्ष और आदिवासी जाति के आराध्य देव शिव ही हैं। शैव धर्म भारत के आदिवासियों का धर्म है।

*🔱27.शिव के प्रमुख नाम : -*  शिव के वैसे तो अनेक नाम हैं जिनमें 108 नामों का उल्लेख पुराणों में मिलता है लेकिन यहां प्रचलित नाम जानें- महेश, नीलकंठ, महादेव, महाकाल, शंकर, पशुपतिनाथ, गंगाधर, नटराज, त्रिनेत्र, भोलेनाथ, आदिदेव, आदिनाथ, त्रियंबक, त्रिलोकेश, जटाशंकर, जगदीश, प्रलयंकर, विश्वनाथ, विश्वेश्वर, हर, शिवशंभु, भूतनाथ और रुद्र।

*🔱28.अमरनाथ के अमृत वचन : -* शिव ने अपनी अर्धांगिनी पार्वती को मोक्ष हेतु अमरनाथ की गुफा में जो ज्ञान दिया उस ज्ञान की आज अनेकानेक शाखाएं हो चली हैं। वह ज्ञानयोग और तंत्र के मूल सूत्रों में शामिल है। 'विज्ञान भैरव तंत्र' एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें भगवान शिव द्वारा पार्वती को बताए गए 112 ध्यान सूत्रों का संकलन है।

*🔱29.शिव ग्रंथ : -* वेद और उपनिषद सहित विज्ञान भैरव तंत्र, शिव पुराण और शिव संहिता में शिव की संपूर्ण शिक्षा और दीक्षा समाई हुई है। तंत्र के अनेक ग्रंथों में उनकी शिक्षा का विस्तार हुआ है।

*🔱30.शिवलिंग : -* वायु पुराण के अनुसार प्रलयकाल में समस्त सृष्टि जिसमें लीन हो जाती है और पुन: सृष्टिकाल में जिससे प्रकट होती है, उसे लिंग कहते हैं। इस प्रकार विश्व की संपूर्ण ऊर्जा ही लिंग की प्रतीक है। वस्तुत: यह संपूर्ण सृष्टि बिंदु-नाद स्वरूप है। बिंदु शक्ति है और नाद शिव। बिंदु अर्थात ऊर्जा और नाद अर्थात ध्वनि। यही दो संपूर्ण ब्रह्मांड का आधार है। इसी कारण प्रतीक स्वरूप शिवलिंग की पूजा-अर्चना है।

*🔱31.बारह ज्योतिर्लिंग : -* सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ॐकारेश्वर, वैद्यनाथ, भीमशंकर, रामेश्वर, नागेश्वर, विश्वनाथजी, त्र्यम्बकेश्वर, केदारनाथ, घृष्णेश्वर। ज्योतिर्लिंग उत्पत्ति के संबंध में अनेकों मान्यताएं प्रचलित है। ज्योतिर्लिंग यानी 'व्यापक ब्रह्मात्मलिंग' जिसका अर्थ है 'व्यापक प्रकाश'। जो शिवलिंग के बारह खंड हैं। शिवपुराण के अनुसार ब्रह्म, माया, जीव, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी को ज्योतिर्लिंग या ज्योति पिंड कहा गया है।

 दूसरी मान्यता अनुसार शिव पुराण के अनुसार प्राचीनकाल में आकाश से ज्‍योति पिंड पृथ्‍वी पर गिरे और उनसे थोड़ी देर के लिए प्रकाश फैल गया। इस तरह के अनेकों उल्का पिंड आकाश से धरती पर गिरे थे। भारत में गिरे अनेकों पिंडों में से प्रमुख बारह पिंड को ही ज्‍योतिर्लिंग में शामिल किया गया।

*🔱32.शिव का दर्शन : -* शिव के जीवन और दर्शन को जो लोग यथार्थ दृष्टि से देखते हैं वे सही बुद्धि वाले और यथार्थ को पकड़ने वाले शिवभक्त हैं, क्योंकि शिव का दर्शन कहता है कि यथार्थ में जियो, वर्तमान में जियो, अपनी चित्तवृत्तियों से लड़ो मत, उन्हें अजनबी बनकर देखो और कल्पना का भी यथार्थ के लिए उपयोग करो। आइंस्टीन से पूर्व शिव ने ही कहा था कि कल्पना ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

*🔱33.शिव और शंकर : -* शिव का नाम शंकर के साथ जोड़ा जाता है। लोग कहते हैं- शिव, शंकर, भोलेनाथ। इस तरह अनजाने ही कई लोग शिव और शंकर को एक ही सत्ता के दो नाम बताते हैं। असल में, दोनों की प्रतिमाएं अलग-अलग आकृति की हैं। शंकर को हमेशा तपस्वी रूप में दिखाया जाता है। कई जगह तो शंकर को शिवलिंग का ध्यान करते हुए दिखाया गया है। अत: शिव और शंकर दो अलग अलग सत्ताएं है। हालांकि शंकर को भी शिवरूप माना गया है। माना जाता है कि महेष (नंदी) और महाकाल भगवान शंकर के द्वारपाल हैं। रुद्र देवता शंकर की पंचायत के सदस्य हैं।

*🔱34. देवों के देव महादेव :* देवताओं की दैत्यों से प्रतिस्पर्धा चलती रहती थी। ऐसे में जब भी देवताओं पर घोर संकट आता था तो वे सभी देवाधिदेव महादेव के पास जाते थे। दैत्यों, राक्षसों सहित देवताओं ने भी शिव को कई बार चुनौती दी, लेकिन वे सभी परास्त होकर शिव के समक्ष झुक गए इसीलिए शिव हैं देवों के देव महादेव। वे दैत्यों, दानवों और भूतों के भी प्रिय भगवान हैं। वे राम को भी वरदान देते हैं और रावण को भी।

*🔱35. शिव हर काल में : -* भगवान शिव ने हर काल में लोगों को दर्शन दिए हैं। राम के समय भी शिव थे। महाभारत काल में भी शिव थे और विक्रमादित्य के काल में भी शिव के दर्शन होने का उल्लेख मिलता है। भविष्य पुराण अनुसार राजा हर्षवर्धन को भी भगवान शिव ने दर्शन दिए थे,

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