Sunday, 26 December 2021
पढ़ाई मे सफलता कैसे मिले
Wednesday, 28 July 2021
काकतीय रूद्रेश्वर मंदिर : यूनेस्को की विश्व धरोहर में सम्मिलित
तेलंगाना के वारंगल में स्थित काकतीय रूद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर को अब विश्व धरोहर की सूची में शामिल कर लिया गया है।
इस मंदिर के निर्माण के दौरान बेहतर नक्काशी और उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। इस मंदिर का प्रभावशाली प्रवेशद्वार, हजार विशाल खंभे और छतों के शिलालेख आकर्षण केंद्र हैं।
यूनेस्को विश्व विरासत स्थल ऐसे विशेष स्थानों (जैसे वन क्षेत्र, पर्वत, झील, मरुस्थल, स्मारक, भवन, या शहर इत्यादि) को कहा जाता है, जो विश्व विरासत स्थल समिति द्वारा चयनित होते हैं। यही समिति इन स्थलों की देखरेख यूनेस्को के तत्वावधान में करती है। इसका उद्देश्य विश्व के ऐसे स्थलों को चयनित एवं संरक्षित करना होता है, जो विश्व संस्कृति की दृष्टि से मानवता के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
कुछ खास परिस्थितियों में ऐसे स्थलों को इस समिति द्वारा आर्थिक सहायता भी दी जाती है। प्रत्येक विरासत स्थल उस देश विशेष की संपत्ति होती है, जिस देश में वह स्थल स्थित है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय का हित भी इसी में होता है कि वे आनेवाली पीढ़ियों के लिए और मानवता के हित के लिए संरक्षण करें।
भारत की धरोहरhttps://youtu.be/bcIhE84XMZM
भारत के 38 यूनेस्को विरासत स्थलों में से 31 सांस्कृतिक धरोहर हैं। सात 7 प्राकृतिक धरोहर हैं और एक मिश्रित धरोहर है। यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची में अब भारत के 48 स्थान शामिल हैं। साल 2020 में मध्य प्रदेश के ग्वालियर और ओरछा शहरों को यूनेस्को के विश्व धरोहर शहरों की सूची में शामिल किया गया था। विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जाने वाला प्रमुख प्राकृतिक धरोहर काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान है। इसे 1985 में विश्व विरासत स्थल के रूप में घोषित किया गया। अन्य एक प्रमुख उद्यान मानस वन्यजीव अभयारण्य को जून 2011 में सूची में शामिल किया गया।
Monday, 26 July 2021
Friday, 23 July 2021
ब्रिटेन में मिला 460 करोड़ साल से छिपा ‘खजाना’, पृथ्वी से भी पुराना, खोल सकता है जीवन के राज
ब्रिटेन के वैज्ञानिकों के हाथ करोड़ों साल पुराना 'खजाना' लगा है. वैज्ञानिकों को करीब 460 करोड़ साल पुराना उल्कापिंड मिला है. यह पत्थर का टुकड़ा धरती से भी पुराना है. धरती की उम्र लगभग 454 करोड़ साल है. यह पत्थर पृथ्वी की उत्पत्ति के कई राज खोल सकता है.
Wednesday, 21 April 2021
केंद्र की महत्वपूर्ण योजनाएं 🏵️🏵️
Saturday, 17 April 2021
भारत के प्रमुख वाद्ययंत्र और उनके वादक
Tuesday, 13 April 2021
चित्रकार रामकुमार
पद्मभूषण से सम्मानित प्रख्यात चित्रकार एवं प्रसिद्ध लेखक रामकुमार का आज सुबह यहां अपने निवास पर निधन हो गया। वह 94 वर्ष के थे। उनके परिवार में एक पुत्र है जो ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं। उनका अंतिम संस्कार यहां निगमबोध घाट पर ढाई बजे दिन में किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश की राजधनी शिमला में 1924 में जन्मे रामकुमार हिंदी के मशहूर लेखक निर्मल वर्मा के बड़े भाई थे।
प्रसिद्ध कला समीक्षक एवं रामकुमार के मित्र प्रयाग शुक्ल ने यूनीवार्ता को बताया कि राम कुमार पिछले 20 दिन से राजधानी के पटपडग़ंज इलाके में स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती थे। वह विश्व विख्यात चित्रकार एमएफ हुसैन, तैयब मेहता और सैयद हैदर रजा के आत्मीय मित्र थे। उनके निधन से आधुनिक भारतीय चित्रकला का एक प्रमुख स्तंभ ढह गया। प्रसिद्ध संस्कृति कमीज़् अशोक वाजपेयी, कला समीक्षक विनोद भारद्वाज, प्रसिद्ध लेखक गिरिधर राठी समेत कई लेखकों, चित्रकारों ने रामकुमार के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
सेंट स्टीफन कालेज से पढ़े रामकुमार ललित कला अकेडमी के फेलो भी थे। उनकी पेंटिंग हुसैन तैयब मेहता की तरह करोड़ो रुपये में बिकती थी। वह अपने अमूर्त चित्रों के लिए जाने जाते थे। उनकी अपनी अलग शैली थी। वह साठ के दशक के चर्चित कहानीकार भी थे। उनकी चित्रों की प्रदर्शनी दुनिया के कई देशों में लगी थी।
कुछ लोगों का हर काम अनूठा होता है। रामकुमार उनमें से एक थे। कहानियां लिखीं तो अनूठी। चित्र बनाए तो अनूठे। वे एक जलते हुए मशाल की तरह थे, जिनकी रोशनी में कई कलाकारों ने अपने-अपने रास्ते देखे। रामकुमार नहीं रहे। कथा और कला की दुनिया में उनकी उपस्थिति ने परंपरा का निर्माण किया था। बनारस पर बनाए उनके चित्रों की लंबे समय तक चर्चा होती रही, लेकिन बाद के चित्रों में भी किसी देश या शहर की यात्रा का प्रभाव दिखता रहा। यह बात अलग है कि अमूर्त शैली की वजह से हमने उन चित्रों को किसी खास शहर से जोड़कर नहीं देखा। प्रकृति उनके बनाए चित्रों में एक अलग ढंग से आती रही। उन्होंने कभी प्रकृति का वास्तविक चित्रण तो नहीं किया, मगर अहसास हमेशा तीव्र रहा। चटकीले रंगों से बचते हुए जगहों का जैसा इंप्रेशन उनके कैनवस पर दिखता है, वह उन्हें दूसरों से अलग रखता है। इस
कथाकार-कलाकार के चित्रों की सबसे बड़ी विशेषता यही थी कि पाठक से संवाद में इनकी कला आत्मीय-सी लगती थी। उनके आकार संवाद की स्थिति बनाते रहे और उसमें हम संवेदना पाते रहे। वे संकोची स्वभाव के थे। अपनी रचनाओं पर खुद बात करने में उन्हें एक झिझक-सी होती थी, लेकिन कला पर बहस के पक्षधर थे। सर्दियों की सुबह उन्हें बहुत पसंद थी। कहते थे, "आकाश खुला-खुला लगता है, मुक्ति-सी महसूस होती है।" बरसों पेरिस में रहे।
छोटे भाई और मशहूर साहित्यकार निर्मल वर्मा के न रहने के बाद, कई बार की बातचीत में उनके अंदर एक खालीपन का अहसास होता था। हाल के दिनों में वह दिल्ली में रह रहे थे। उनके अब न रहने पर ऐसा लगता है, मानो एक ऐसा कलाकार चला गया, जिनकी आंखें और दिल हमेशा एक नए शहर की तलाश करते थे। 1924 में शिमला में जन्मे रामकुमार मशहूर लेखक निर्मल वर्मा के बड़े भाई थे। अपने समकालीन चित्रकारों एम.एफ. हुसैन, तैयब मेहता और सैयद हैदर रजा की तरह रामकुमार भी प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप से जुड़े हुए थे।
Friday, 2 April 2021
Bauddha sangitiya ,बौद्ध सगितिया
बौद्ध संगीतियांः स्थान, अध्यक्ष, शासनकाल
══━━━━━━━✧❂✧━━━━━━━═🔴Art-gyan-kala 👉https://youtube.com/c/ArtGyankala
╭─❀⊰╯“प्रथम बौद्ध संगीति”
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◎ स्थान ➛ राजगृह (सप्तपर्णी गुफा)
◎ समय ➛ 483 ई.पू.
◎ अध्यक्ष ➛ महाकस्सप
◎ शासनकाल ➛ अजातशत्रु (हर्यक वंश) के काल में ।
◎ उद्देश्य ➛ बुद्ध के उपदेशों को दो पिटकों विनय पिटक तथा सुत्त पिटक में संकलित किया गया।
╭─❀⊰╯“द्वितीय बौद्ध संगीति”
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◎ स्थान ➛ वैशाली
◎ समय ➛ 383 ई.पू.
◎ अध्यक्ष ➛ साबकमीर (सर्वकामनी)
◎ शासनकाल ➛ कालाशोक (शिशुनाग वंश) के शासनकाल में।
◎ उद्देश्य ➛ अनुशासन को लेकर मतभेद के समाधान के लिए बौद्ध धर्म स्थापित एवं महासांघिक दो भागों में बँट गया।
╭─❀⊰╯ “तृतीय बौद्ध संगीति”
╨──────────────━❥
◎ स्थान ➛ पाटलिपुत्र
◎ समय ➛ 251 ई.पू.
◎ अध्यक्ष ➛ मोग्गलिपुत्ततिस्स
◎ शासनकाल ➛ अशोक (मौर्यवंश) के काल में।
◎ उद्देश्य ➛ संघ भेद के विरुद्ध कठोर नियमों का प्रतिपादन करके बौद्ध धर्म को स्थायित्व प्रदान करने का प्रयत्न किया गया। धर्म ग्रन्थों का अंतिम रूप से सम्पादन किया गया तथा तीसरा पिटक अभिधम्मपिटक जोङा गया।
╭─❀⊰╯ “चतुर्थ बौद्ध संगीति”
╨──────────────━❥
◎ स्थान ➛ कश्मीर के कुण्डलवन
◎ समय ➛ प्रथम शता. ई.
◎ अध्यक्ष ➛ वसुमित्र
◎ उपाध्यक्ष ➛ अश्वघोष
◎ शासनकाल ➛ कनिष्क (कुषाण वंश) के काल में।
◎ उद्देश्य ➛ बौद्ध धर्म का
Monday, 25 January 2021
Padma Awards 2021
1. शिंजो आबे (जनसेवा, जापान)
जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे को जनसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों लिए पद्म विभूषण सम्मान दिया गया है। उनके कार्यकाल में भारत-जापान के बीच द्विपक्षीय संबंधों में काफी प्रगति हुई थी। आबे ने साल 2007 में जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच चतुर्भुज सुरक्षा वार्ता शुरू की थी। अगस्त 2007 में भारत की तीन दिवसीय यात्रा ने भारत और जापान के बीच मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों के लंबे इतिहास पर एक नए द्विपक्षीय एशियाई गठबंधन के लिए सहमति दी थी।
देश के प्रसिद्ध गायक एसपी बालासुब्रमण्यम ने 50 साल के गायकी करियर में तेलुगू, तमिल, कन्नड़, हिंदी और मलयालम में 40,000 से ज्यादा गाने गाए थे। बाला ने तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और हिंदी भाषा की 40 से ज्यादा फिल्मों में संगीत निर्देशक का काम भी किया। उन्हें 2001 में पद्मश्री और 2011 में पद्मभूषण से नवाजा जा चुका है। उनका निधन 25 सितंबर 2020 को हुआ।
3. डॉ. बेल्ले मोनप्पा हेगड़े (चिकित्सा, तमिलनाडु)
डॉ. बेल्ले मोनप्पा हेगड़े कर्नाटक के प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ हैं। वे शिक्षाविद, प्रेरक वक्ता और लेखक भी हैं। उन्होंने चिकित्सा पद्धति और नैतिकता पर कई किताबें लिखी हैं। उन्हें 2010 में पद्म भूषण अवॉर्ड दिया गया था।
4. नरिंदर सिंह कपानी (विज्ञान और प्रौद्योगिकी, यूएसए)
भारतीय मूल के अमेरिकी भौतिक वैज्ञानिक हैं। उन्हें फोर्ब्स मैगजीन ने बिजनेसमैन ऑफ द सेंचुरी एडिशन में अनसंग हीरोज के तौर पर नामित किया था। उन्होंने ही 1956 में फाइबर ऑप्टिक्स शब्द ईजाद किया था। कपानी के शोध और आविष्कारों में फाइबर-ऑप्टिक्स संचार, लेजर, बायोमेडिकल इंस्ट्रूमेंटेशन, सौर ऊर्जा और प्रदूषण निगरानी शामिल हैं। उनके पास सौ से अधिक पेटेंट हैं और नेशनल इन्वेंटर्स काउंसिल के सदस्य थे।
दिल्ली में रहने वाले मौलाना वहीदुद्दीन खान का जन्म 1 जनवरी 1925 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में हुआ था। वे प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वान और शांति कार्यकर्ता हैं। उन्हें सोवियत संघ के दौर में राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव ने डेमिर्गुस पीस इंटरनेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया था। उन्हें 2000 में पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है। इन्होंने कुरान को सरल और समकालीन अंग्रेजी में अनुवाद किया है और कुरान पर एक टिप्पणी भी लिखा है और ये कई टेलीविजन चैनलों पर व्याख्यान देते रहते हैं।
6. बीबी लाल (पुरातत्व, दिल्ली)
दिल्ली के प्रसिद्ध पुरातत्वविद बीबी लाल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक रह चुके हैं। उनकी किताब 'राम, उनकी ऐतिहासिकता, मंदिर और सेतु: साहित्य, पुरातत्व और अन्य विज्ञान' को लेकर खासी बहस हुई थी। इसमें विवादित ढांचे के नीचे मंदिर होने की बात कही गई थी। उन्हें पहले पद्म भूषण दिया जा चुका है।
7. सुदर्शन साहू (कला, ओडिशा)
ओडिशा के सुदर्शन साहू प्रसिद्ध मूर्तिकार हैं। वे पौराणिक कथाओं को रेत की मूर्तियों में ढालने में माहिर हैं। उनकी बनाई कलाकृतियों की प्रदर्शनी देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। उन्हें पहले पद्म श्री से सम्मानित किया जा चुका है। वे अक्सर क्रिकेट मैच के दौरान खिलाड़ियों के भी चित्र उकेरते थे।
सूची : इन्हें मिलेगा पद्म भूषण
| नाम | क्षेत्र | राज्य |
| कृष्णन नायर शांताकुमारी | कला | केरल |
| तरूण गोगोई (मरणोपरांत) | जनसेवा | असम |
| चंद्रशेखर कंबारा | साहित्य और शिक्षा | कर्नाटक |
| सुमित्रा महाजन | जनसेवा | मध्य प्रदेश |
| नृपेंद्र मिश्र | लोक सेवा | उत्तर प्रदेश |
| रामविलास पासवान | जनसेवा | बिहार |
| केशुभाई पटेल | जनसेवा | गुजरात |
| कल्बे सादिक | धर्म | उत्तर प्रदेश |
| रजनीकांत देवदास श्रॉफ | व्यापार उद्योग | महाराष्ट्र |
| तरलोचन सिंह | जनसेवा | हरियाणा |
सूची : इन्हें मिलेगा पद्मश्री सम्मान
| नाम | क्षेत्र | राज्य |
| गुलफाम अहमद | कला | उत्तर प्रदेश |
| पी अनीता | खेल | तमिलनाडु |
| रामास्वामी अन्ना वरापू | कला | आंध्र प्रदेश |
| सुब्बू अरूमुगम | कला | तमिलनाडु |
| प्रकाशराव आशावादी | साहित्य और शिक्षा | आंध्र प्रदेश |
| भूरी बाई | कला | मध्य प्रदेश |
| राधेश्याम बरले | कला | छत्तीसगढ़ |
| धर्म नारायण बर्मा | साहित्य और शिक्षा | पश्चिम बंगाल |
| लक्ष्मी बरुआ | समाज सेवा | असम |
| बीरेंद्र कुमार बसक | कला | पश्चिम बंगाल |
| रजनी बेक्टर | व्यापार उद्योग | पंजाब |
| पीटर ब्रूक | कला | यूनाइटेड किंग्डम |
| संगखुमी बुकालच्वाक | समाज सेवा | मिजोरम |
| गोपीराम बरगायन बुराभकत | कला | असम |
| बिजोय चक्रवर्ती | जनसेवा | असम |
| सुजीत चट्टोपाध्याय | साहित्य और शिक्षा | पश्चिम बंगाल |
| जगदीश चौधरी (मरणोपरांत) | समाज सेवा | उत्तर प्रदेश |
| सुल्ट्रीम चोनजोर | समाज सेवा | लद्दाख |
| माउमा दास | खेल | पश्चिम बंगाल |
| श्रीकांत दतर | साहित्य और शिक्षा | यूएसए |
| नारायण देबनाथ | कला | पश्चिम बंगाल |
| चुटनी देवी | समाज सेवा | झारखंड |
| दुलारी देवी | कला | बिहार |
| राधे देवी | कला | मणिपुर |
| शांति देवी | समाज सेवा | ओडिशा |
| वयन डिबिया | कला | इंडोनेशिया |
| दादूदन गढ़वी | साहित्य और शिक्षा | गुजरात |
| परशुराम आत्मराम गंगावने | कला | महाराष्ट्र |
| जय भगवान गोयल | साहित्य और शिक्षा | हरियाणा |
| जगदीश चंद्र हलदर | साहित्य और शिक्षा | पश्चिम बंगाल |
| मंगल सिंह | साहित्य और शिक्षा | असम |
| अंशु जम्सेनपा | खेल | अरुणाचल प्रदेश |
| पुर्णमासी जानी | कला | ओडिशा |
| माथा बी मंजम्मा जोगाती | कला | कर्नाटक |
| दामोदरन कैथा प्राम | कला | केरल |
| नाम देव सी कांब्ले | साहित्य और शिक्षा | महाराष्ट्र |
| महेश भाई और नरेश भाई कनोडिया (मरणोपरांत) | कला | गुजरात |
| रजत कुमार | साहित्य और शिक्षा | ओडिशा |
| रंगास्वामी लक्ष्मीनारायण कश्यप | साहित्य और शिक्षा | कर्नाटक |
| प्रकाश कौर | समाज सेवा | पंजाब |
| निकोलस कजानस | साहित्य और शिक्षा | ग्रीस |
| के केशव सामी | कला | पुडुचेरी |
| गुलाम रसूल खान | कला | जम्मू कश्मीर |
| लाखा खान | कला | राजस्थान |
| संजीदा खातून | कला | बांग्लादेश |
| विनायक विष्णु खेडेकर | कला | गोवा |
| नीरु कुमार | समाज सेवा | दिल्ली |
| लाजवंती | कला | पंजाब |
| रतन लाल | विज्ञान और अभियांत्रिकी | USA |
| अली मानिकफन | नवोन्मेष | लक्षद्वीप |
| रामचंद्र मांझी | कला | बिहार |
| दुलाल मंकी | कला | असम |
| नानाद्रो बी मारक | कृषि | मेघालय |
| रेवबेन माशांग्वा | कला | मणिपुर |
| चंद्रकांत मेहता | साहित्य और शिक्षा | गुजरात |
| रतनलाल मित्तल | चिकित्सा | पंजाब |
| माधवन नामबियार | खेल | केरल |
| श्याम सुंदर पालीवाल | समाज सेवा | राजस्थान |
| चंद्रकांत शांभाजी पांडव | चिकित्सा | दिल्ली |
| सोलोमान पप्पाया | साहित्य, शिक्षा, पत्रकारिता | तमिलनाडु |
| पप्पामल | कृषि | तमिलनाडु |
| कृष्ण मोहन पाथी | चिकित्सा | ओडिशा |
| जसवंती बेन जमुनादास पोपट | व्यापार उद्योग | महाराष्ट्र |
| गिरीश प्रभोने | समाज सेवा | महाराष्ट्र |
| नंदा प्रस्टी | साहित्य और शिक्षा | ओडिशा |
| केके रामचंद्र पुलावर | कला | केरल |
| बालन पुथेरी | साहित्य और शिक्षा | केरल |
| बिरुबाला राभा | समाज सेवा | असम |
| कनक राजू | कला | तेलंगाना |
| बॉम्बेजयश्री रामनाथ | कला | तमिलनाडु |
| सत्याराम रियांग | कला | त्रिपुरा |
| धनंजय दिवाकर सचदेव | चिकित्सा | केरल |
| अशोक कुमार साहू | चिकित्सा | उत्तर प्रदेश |
| भूपेंद्र कुमार सिंह संजय | चिकित्सा | उत्तराखंड |
| सिंधु ताई सपकाल | समाज सेवा | महाराष्ट्र |
| चमनलाल सप्रू (मरणोपरांत) | साहित्य और शिक्षा | जम्मू |
| रोमन शर्मा | साहित्य, शिक्षा, पत्रकारिता | असम |
| इमरान शाह | साहित्य और शिक्षा | असम |
| प्रेमचंद्र शर्मा | कृषि | उत्तराखंड |
| अर्जुन सिंह शेखावत | साहित्य और शिक्षा | राजस्थान |
| रामयत्न शुक्ला | साहित्य और शिक्षा | उत्तर प्रदेश |
| जितेंद्र सिंह शंटी | समाज सेवा | दिल्ली |
| करतार पारस राम सिंह | कला | हिमाचल प्रदेश |
| करतार सिंह | कला | पंजाब |
| दिलीप कुमार सिंह | चिकित्सा | बिहार |
| चंद्रशेखर सिंह | कृषि | उत्तर प्रदेश |
| सुधा हरिनारायण सिंह | खेल | उत्तर प्रदेश |
| बीरेंद्र सिंह | खेल | हरियाणा |
| मृदुला सिन्हा (मरणोपरांत) | साहित्य और शिक्षा | बिहार |
| केसी शिवशंकर (मरणोपरांत) | कला | तमिलनाडु |
| गुरुमां कमलीसोरेन | समाज सेवा | पश्चिम बंगाल |
| माराची शुब्बूरमन | समाज सेवा | तमिलनाडु |
| पी सुब्रमण्यन (मरणोपरांत) | व्यापार उद्योग | तमिलनाडु |
| नीदूमोलू सुमती | कला | आंध्र प्रदेश |
| कपिल तिवारी | साहित्य और शिक्षा | मध्य प्रदेश |
| फॉदर वॉल्स (मरणोपरांत) | साहित्य और शिक्षा | स्पेन |
| थिरूवेंगदम वीरा राघवन | चिकित्सा | तमिलनाडु |
| श्रीधर वेंबू | व्यापार उद्योग | तमिलनाडु |
| के वाई वेंकटेश | खेल | कर्नाटक |
| उषा यादव | साहित्य और शिक्षा | उत्तर प्रदेश |
| कर्नल काजी सज्जाद अली जाहिर | जनसेवा | बांग्लादेश |
दुनिया की सबसे बड़ी गुफा,
मधुबनी की मिथिला पेंटिंग कलाकार दुलारी देवी को मिलेगा पद्मश्री
गांव के ही मिथिला पेंटिंग की ख्यातिलब्ध कलाकार कर्पूरी देवी के घर उन्हें झाड़ू-पोंछा का काम मिला। इस दौरान फुर्सत के समय में दुलारी अपने घर-आंगन को माटी से पोतकर, लकड़ी की कूची बना कल्पनाओं को आकृति देने लगीं। कर्पूरी देवी का साथ पाकर दुलारी ने मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली। दुलारी अब तक सात हजार मिथिला पेंटिंग विविध विषयों पर बना चुकी हैं। 2012-13 में दुलारी राज्य पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं।
गीता वुल्फ की पुस्तक 'फॉलोइंग माइ पेंट ब्रश' और मार्टिन लि कॉज की फ्रेंच में लिखी पुस्तक मिथिला में दुलारी की जीवन गाथा व कलाकृतियां सुसज्जित हैं। सतरंगी नामक पुस्तक में भी इनकी पेंटिग ने जगह पाई है। इग्नू के लिए मैथिली में तैयार किए गए आधार पाठ्यक्रम के मुखपृष्ठ के लिए भी इनकी पेंटिग चुनी गई। पटना में बिहार संग्रहालय के उद्घाटन के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दुलारी देवी को विशेष तौर पर आमंत्रित किया। वहां कमला नदी की पूजा पर इनकी बनाई एक पेंटिग को जगह दी गई है।
गांव के ही मिथिला पेंटिंग की ख्यातिलब्ध कलाकार कर्पूरी देवी के घर उन्हें झाड़ू-पोंछा का काम मिला। इस दौरान फुर्सत के समय में दुलारी अपने घर-आंगन को माटी से पोतकर, लकड़ी की कूची बना कल्पनाओं को आकृति देने लगीं। कर्पूरी देवी का साथ पाकर दुलारी ने मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली। दुलारी अब तक सात हजार मिथिला पेंटिंग विविध विषयों पर बना चुकी हैं। 2012-13 में दुलारी राज्य पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं।
गीता वुल्फ की पुस्तक 'फॉलोइंग माइ पेंट ब्रश' और मार्टिन लि कॉज की फ्रेंच में लिखी पुस्तक मिथिला में दुलारी की जीवन गाथा व कलाकृतियां सुसज्जित हैं। सतरंगी नामक पुस्तक में भी इनकी पेंटिग ने जगह पाई है। इग्नू के लिए मैथिली में तैयार किए गए आधार पाठ्यक्रम के मुखपृष्ठ के लिए भी इनकी पेंटिग चुनी गई। पटना में बिहार संग्रहालय के उद्घाटन के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दुलारी देवी को विशेष तौर पर आमंत्रित किया। वहां कमला नदी की पूजा पर इनकी बनाई एक पेंटिग को जगह दी गई है।
गांव के ही मिथिला पेंटिंग की ख्यातिलब्ध कलाकार कर्पूरी देवी के घर उन्हें झाड़ू-पोंछा का काम मिला। इस दौरान फुर्सत के समय में दुलारी अपने घर-आंगन को माटी से पोतकर, लकड़ी की कूची बना कल्पनाओं को आकृति देने लगीं। कर्पूरी देवी का साथ पाकर दुलारी ने मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली। दुलारी अब तक सात हजार मिथिला पेंटिंग विविध विषयों पर बना चुकी हैं। 2012-13 में दुलारी राज्य पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं।
गीता वुल्फ की पुस्तक 'फॉलोइंग माइ पेंट ब्रश' और मार्टिन लि कॉज की फ्रेंच में लिखी पुस्तक मिथिला में दुलारी की जीवन गाथा व कलाकृतियां सुसज्जित हैं। सतरंगी नामक पुस्तक में भी इनकी पेंटिग ने जगह पाई है। इग्नू के लिए मैथिली में तैयार किए गए आधार पाठ्यक्रम के मुखपृष्ठ के लिए भी इनकी पेंटिग चुनी गई। पटना में बिहार संग्रहालय के उद्घाटन के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दुलारी देवी को विशेष तौर पर आमंत्रित किया। वहां कमला नदी की पूजा पर इनकी बनाई एक पेंटिग को जगह दी गई है।


