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Friday, 14 August 2020

लॉकडाउन में कलाकारों ने तैयार किए आर्टवर्क

राज्य की संस्कृति-परंपरा को सहेजने और देशभर में प्रमोट करने शहर के कलाकारों ने तैयार किए आर्ट वर्क

शहर के आर्टिस्ट कोरोनाकाल में मिले खाली समय में अपने हुनर के दम पर यूनीक आर्ट तैयार करने में लगे हैं। आर्ट के जरिए कलाकार अपनी संस्कृति और परंपरा काे सहेजने के साथ ही देशभर में उसे प्रमोट करने का प्रयास भी कर रहे हैं। राम इंदाैरिया ने लाेहे और पीतल काे गलाकर 22 दिन की मेहनत से खास स्कल्पचर तैयार किया है। ललित कला एकेडमी की सदस्य और पेंटिंग आर्टिस्ट सुनीता वर्मा ने भाेजली त्याेहार पर पेंटिंग तैयार की है। वहीं, कलाकार अमित साेनी ने खारुन नदी की मिट्टी से 12 दिन की मेहनत से भगवान शिव की डेढ़ फीट की मूर्ति तैयार की है। युवा पीढ़ी काे संस्कृति से जाेड़ने के मकसद से इन कलाकाराें ने अपने आर्ट काे माॅडर्न टच देने की काेशिश भी की है। तीनाें कलाकार इन आर्ट पीस काे नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर हाेने वाले एग्जीबिशन में प्रदर्शित करेंगे।

भाेजली पर्व से जुड़ी परंपरा और बदलावों पर बनाया आर्ट वर्क
ललित कला एकेडमी की सदस्य और आर्टिस्ट सुनीता वर्मा ने नेशनल लेवल एग्जीबिशन के लिए भाेजली पर्व पर पेंटिंग तैयार की है। हमारे राज्य में भोजली पर्व का विशेष महत्व है। सावन के दौरान लोकगीत गाते हुए सिर पर भोजली रखकर उसका विसर्जन किया जाता है। सुनीता ने इसी पर्व पर दाे फीट के कैनवास पर पेंटिंग तैयार की है। माॅडर्न जनरेशन फेस्टिवल ताे मनाती है, लेकिन अपने अंदाज में। इसी वजह से यंगस्टर्स काे ध्यान में रखकर उन्हाेंने भोजली को मॉडर्न आर्ट के तौर पर पेश किया है। ये पेंटिंग उन्हाेंने वाटर कलर से तैयार की है।

250 ग्राम की 9 घंटियों से बनाया स्कल्पचर- खरपड़ी

Dainik Bhaskar

आर्टिस्ट राम इंदौरिया ने 22 दिन में खास स्कल्पचर बनाया है। उन्हाेंने बताया, पहले राज्य में गाय और बैल के गले में बड़ी घंटी बांधते थे, जिसका वजन 300 ग्राम तक होता था। इस घंटी को छत्तीसगढ़ी में खरपड़ी कहते हैं। इसी पुरानी पहचान काे जिंदा करने स्कल्पचर बनाया है। लोहे-पीतल को गलाकर 250 ग्राम की 9 घंटियां तैयार कीं, फिर उनसे स्कल्पचर बनाया। राम इसे नेशनल लेवल एग्जीबिशन में डिस्प्ले करेंगे।


आर्टिस्ट अमित सोनी ने खारुन नदी की मिट्‌टी से भगवान शंकर की मूर्ति बनाई है। डेढ़ फीट ऊंची इस मूर्ति काे उन्हाेंने 12 दिन में तैयार किया है। मूर्ति में भगवान शंकर को चलती हुई मुद्रा में दिखाया गया है। फेब्रिक कलर से इस पर ब्लू रंग किया गया है। अमित ने बताया कि ये मूर्ति उन्हाेंने काठमांडू, नेपाल में होने वाली एग्जीबिशन के लिए तैयार की है। काेराेना की वजह से एग्जीबिशन स्थगित कर दी गई है। स्थिति सुधरने के बाद नई डेट जारी की जाएगी या कार्यक्रम ऑनलाइन कराया जाएगा।

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